MP: मंडी के निजीकरण के विरोध में हड़ताल, मंत्रालय पर प्रदर्शन

Model Mandi Act: मॉडल एक्ट खिलाफ मंडी कर्मचारी-अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, लाखों हम्माल-तुलावली और व्यापारियों ने भी किया काम बंद

Updated: Sep 03, 2020 02:41 PM IST

MP: मंडी के निजीकरण के विरोध में हड़ताल, मंत्रालय पर प्रदर्शन
Photo Courtesy: naidunia

भोपाल। मध्यप्रदेश में मॉडल एक्ट खिलाफ प्रदेश के मंडी कर्मचारी-अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। मंडी कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन लाखों हम्माल-तुलावली और व्यापारियों ने किया है। किसानों ने भी निजी मंडियों के खिलाफ इस हड़ताल का समर्थन किया है। हड़ताली कर्मचारियों ने भोपाल में मंत्रालय पर विरोध प्रदर्शन किया। 

यह प्रदेशव्यापी हड़ताल निजी मंडियों के खिलाफ है। मंडी अधिकारी-कर्मचारी भोपाल स्थित मंडी बोर्ड के मुख्यालय में एकत्रित होकर इस एक्ट का विरोध कर रहे हैं। मंडी कर्मचारी और अधिकारियों की बेमियादी हड़ताल से तमाम मंडियां बंद हैं। वहीं इस हड़ताल में सब्जी मंडियां भी शामिल हैं जिससे सब्जियों की किल्लत होने की संभावना है।

 मंडी कर्मचारियों की हड़ताल

निजी कंपनियों के ऑफर से सरकारी मंडियों को होगा नुकसान

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि एक सरकारी मंडी के नियंत्रण से बाहर निजी कंपनियों को अनाज खरीदने की परमीशन मिलने से वे शक्कर मिलों की तरह किसानों के अनाज का पैसा नियम अनुसार भुगतान नहीं करेंगी। निजी कंपनियों के आकर्षक ऑफर की वजह से सरकारी मंडियों में न तो अनाज की आवक होगी और न ही व्यापार होगा। इससे प्रदेश भर में लाखों मध्यमवर्गीय व्यापारी, हम्माल, तुलावटी बेरोजगार हो जाएंगे। सरकारी मंडियों में होने वाला व्यापार खत्म हो जाएगा। इससे मंडी फीस से मिलने वाली आय भी खत्म हो जाएगी। जिसकी वजह से सरकारी मंडियों में काम करने वाले प्रदेश के करीब 10 हजार कर्मचारी और करीब 3000 पेंशनर्स और उनके परिवारों के 50 हजार सदस्यों के सामने भूखे मरने की स्थिति हो जाएगी।

कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 के विपरीत है मॉडल एक्ट

दरअसल यह मॉडल एक्ट कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 के विपरीत है। अधिनियम 1972 में किसानों को दलालों, आढ़तियों के शोषण से मुक्त रहने के लिए कड़े प्रावधान के साथ बनाया गया था, जिसका लक्ष्य किसानों को उनकी कृषि उपज का उचित दाम दिलाना था। वहीं इस मॉडल एक्ट में बड़े व्यापारी, निजी कंपनियों को सुविधा दी गई है। मॉडल एक्ट 2020 के तहत निजी मंडी, उपज मंडी, यार्ड के प्लेटफार्म और सीधे उपार्जन की व्यवस्था की गई है, इस मॉडल एक्ट की वजह से आदिवासी इलाकों में छोटे और मझोले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यही वजह है कि प्रदेश के मंडी कर्मचारी-अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। और इस मॉडल एक्ट का पुरजोर विरोध कर रहे हैं।  

 इन मांगों पर अड़े हैं मंडी कर्मचारी

सरकार मंडी समिति, मंडी बोर्ड के कर्मचारियों को कृषि विपणन में शामिल करे। मंडी कर्मचारियों, पेंशन भोगियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मंडी शुल्क के आधार पर वेतन, पेंशन की व्यवस्था की जाए। सभी श्रेणियों के मंडी कर्मचारियों के वेतन में समानता हो। वहीं लाइसेंसधारी हम्माल, तुलावटियों के लिए भी पेंशन की व्यवस्था की मांग की जा रही है। किसानों को मंडी में उपज बेचने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

गौरतलब है कि प्रदेश में 259 मंडियां, 298 उप मंडियां, 13 तकनीकी संभाग, 7 आंचलिक कार्यालय के साथ मंडी बोर्ड मुख्यालय के सभी अधिकारी कर्मचारी मॉडल एक्ट के खिलाफ हैं। इस हड़ताल से पहले भी वे मई में इस एक्ट के विरोध में काली पट्टी बांधकर काम कर चुके हैं।