MP में मूंग किसानों का बुराहाल, सरकारी डेडलाइन के दो हफ्ते बाद भी नहीं शुरू हुई मूंग की खरीदी, सड़कों पर उतरी किसान कांग्रेस

मध्यप्रदेश सरकार भूली किसानों से किया हुआ वादा, 15 जून से होनी थी MSP पर मूंग की खरीदी, 18 दिन बाद भी खरीदी की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई, हरदा में किसान कांग्रेस ने गांधीवादी तरीके से किया प्रदर्शन

Updated: Jul 03, 2021, 05:52 PM IST

MP में मूंग किसानों का बुराहाल, सरकारी डेडलाइन के दो हफ्ते बाद भी नहीं शुरू हुई मूंग की खरीदी, सड़कों पर उतरी किसान कांग्रेस
Photo Courtesy : oneindia

हरदा। मध्यप्रदेश में मूंग के किसानों का बुराहाल है। राज्य सरकार ने महीनों पहले ही MSP की घोषणा करते दिया था, साथ ही 15 जून से मूंग की खरीद होनी थी। लेकिन स्थिति यह है कि अबतक मूंग की खरीदी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है, नतीजतन किसानों रजिस्ट्रेशन करने के बाद औने-पौने भाव में मूंग बेचने पर विवश हो गए हैं। मूंग किसानों के समर्थन में किसान कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसकी शुरुआत हरदा से हुई है। 

हरदा जिले में आज मध्यप्रदेश किसान कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष केदार शंकर सिरोही के नेतृत्व में किसानों ने 10 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च किया। ग्राम कड़ोला उबाड़ी से कृषि मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सैंकडों किसान कलेक्टर ऑफिस पहुंचे और यहां उन्होंने सीएम शिवराज के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापण सौंपा। इस पद यात्रा में शामिल किसानों ने बताया कि राज्य सरकार ने खरीदी की घोषणा करके असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है। हमें पता तो हो कि हमारा अनाज खरीदा जाएगा या नहीं?'

ये हैं किसानों की मुख्य मांगें

* साल 2018 के खरीफ फसल सोयाबीन का भावन्तर 500 रु प्रति कुंटल प्रदान किया जाए। साथ ही वर्ष 2019 रबी फसल गेह का बोनस प्रदान किया जाए।

* प्राकृतिक आपदा से वर्ष 2019 में खरीफ में हुए नुकसान के मुआवजे की बाकी किश्ते एवं 2020 की एक किश्त को किसानों के खाते में हस्तांतरित की जाए।

* खरीफ 2020 के फसल बीमा की राशि तुरंत प्रदान की जाए। 

* हरदा में अमानक बीज उत्पादन एवं बिक्री की विशेष दल के माध्यम से जाँच की जाए एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

* किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले इनपुट की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। सरकार की लापरवाही के कारण किसानों को 6 हजार के सोयबीन बीज 12 हजार क्विंटल तक खरीदने पड़े हैं इसलिए प्रत्येक किसानों को बीज अनुदान के रूप में सहायता राशि दी जाए।

* खरीफ 2021 में उड़द और सोयबीन की फसल खराब हुई है उनका सर्वे करवाकर तुरंत सहायता राशि प्रदान की जाए। 

* बढ़े हुए बिजली बिल तुरन्त वापस लिए जाए एवं सभी गाँवो के ट्रांसफार्मर दुरुस्त किए जाएं साथ ही वर्ष 2019 खरीफ फसल के बचे हुए किसानों को बीमा दिया जाए