मुंबई बम धमाकों के दोषी यूसुफ मेमन की जेल में मौत

 युसुफ़ मेमन को 2007 में मुंबई बम धमाकों की साज़िश में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी

Publish: Jun 27, 2020 02:49 AM IST

मुंबई बम धमाकों के दोषी यूसुफ मेमन की जेल में मौत

बॉम्बे बम ब्लास्ट के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन के भाई युसुफ़ मेमन की मृत्यु हो गई है। युसुफ़ महाराष्ट्र के नासिक सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा था। बताया जा रहा है कि मेमन सुबह में ब्रश करने के दौरान अचानक गिर गया। उसे आनन फानन में नासिक के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

2007 में युसुफ़ मेमन को 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों की साज़िश में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।

शरद पवार के झूठ ने कैसे बचाई लोगों की जान

मुंबई में 12 मार्च 1993 को एक के बाद एक 12 जगहों पर धमाके हुए थे। धमाके में 257 बेकसूर लोगों की जानें चली गईं। अनगिनत लोग गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गए। लेकिन घायलों और मृतकों का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता था अगर महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने झूठ नहीं बोला होता। शरद पवार के एक झूठ ने सैकड़ों या हज़ारों अन्य लोगों की जान जाने से बचा ली।

12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 जगहों पर धमाके हुए थे। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने कहा था कि मुंबई में 13 जगहों पर धमाके हुए हैं। शरद पवार के इसी झूठ ने न जाने कितने और लोगों की ज़िंदगी खत्म होने से बचा लिया। दरअसल उस दिन मुंबई में जितने भी धमाके हुए थे, सभी शहर के हिन्दू बाहुल्य इलाकों में हुए थे। मुख्यमंत्री शरद पावर ने दूरदर्शन के स्टूडियो में बम धमाकों की जानकारी देते हुए कुल 13 जगहों का नाम लिया, जिसमें पवार ने शहर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके का नाम भी जोड़ दिया। पवार ने शहर के मुस्लिम बाहुल्य इलाके बूंदे का नाम लिया। इस तरह पवार की इस घोषणा मात्र ने बम धमाकों में अपनों को खोने वाली मुंबई को दंगों से दहल उठने से बचा लिया। शरद पवार ने इस घटना का ज़िक्र अपनी आत्मकथा ' ऑन माय टर्म्स ' में किया है। पवार ने बताया है कि मुंबई दंगों के लिए गठित हुई श्री कृष्ण आयोग के समक्ष जब उन्होंने अपने इस झूठ को कबूला, तब आयोग ने उनके इस झूठ की प्रशंसा की थी।