सिंधिया समर्थक विधायक जज्जी को बड़ा झटका, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार

जज्जी ने चुनाव में पंजाब में बना कीर जाति का प्रमाण पत्र लगाया था। ये जाति पंजाब प्रांत में अनुसूचित जाति की श्रेणी में आती है, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सामान्य वर्ग में आती है।

Updated: Apr 12, 2023, 07:36 PM IST

सिंधिया समर्थक विधायक जज्जी को बड़ा झटका, फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट ने स्टे देने से किया इनकार

ग्वालियर। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक अशोक नगर से भाजपा विधायक जजपाल सिंह जज्जी को ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में फंसे जज्जी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने सिंगल बेंच में चल रही चुनाव याचिका पर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए इस मामले की 4 मई को सुनवाई तय की है।

दरअसल, ये मामला चुनाव में जज्जी की ओर से फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाने का है। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में जजपाल सिंह जज्जी कांग्रेस के टिकट से अशोकनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे और उन्होंने भाजपा के लड्डू राम कोरी को हराया था। चुनाव हारने के बाद लड्डू राम कोरी ने हाई कोर्ट में जज्जी के जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ याचिका दायर की थी। बाद में जज्जी सिंधिया के साथ पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए। 2020 में भाजपा के टिकट से उपचुनाव लड़ा और फिर से विधायक निर्वाचित हुए।

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पिछले साल दिसंबर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने लड्डू राम कोरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह माना था कि जजपाल सिंह जज्जी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विधायक चुने गए थे। उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जज्जी के खिलाफ धारा 420, 467, 468 के तहत FIR करने के आदेश दिए थे। साथ ही जज्जी का निर्वाचन शून्य कर तत्काल प्रभाव से वेतन पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए थे।

विधायक जजपाल सिंह ने लड्‌डूराम की याचिका की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। तर्क दिया था कि जब जाति प्रमाण पत्र की वैधता के मामले में मप्र हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में मामला चल रहा है, डिवीजन बेंच ने ही जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने के सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। ऐसे में जब एक प्रकरण की डिवीजन बेंच में सुनवाई चल रही है तो सिंगल बेंच चुनाव याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती। लेकिन हाईकोर्ट ने जज पाल के आवेदन को खारिज कर दिया।

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दरअसल, जज्जी ने चुनाव में पंजाब में बना कीर जाति का प्रमाण पत्र लगाया था। ये जाति पंजाब प्रांत में अनुसूचित जाति की श्रेणी में आती है, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सामान्य वर्ग में आती है। इसलिए जजपाल सिंह को मध्य प्रदेश में आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, वो मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और इनका प्रमाण पत्र वहीं बनेगा और मान्य किया जाएगा।