30-40 सीटी वैल्यू के मरीजों की रिपोर्ट भी आ रही है निगेटिव, क्या संक्रमण के आंकड़ों को छिपाने का यह तरीका अपना रही है सरकार

आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक जिस व्यक्ति की सीटी वैल्यू 40 से नीचे है उसे कोरोना से संक्रमित होना चाहिए, लेकिन भोपाल में कई ऐसे मामले हैं जिसमें 30-40 की सीटी वैल्यू वाले मरीजों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ रही है

Updated: Apr 03, 2021, 10:27 AM IST

30-40 सीटी वैल्यू के मरीजों की रिपोर्ट भी आ रही है निगेटिव, क्या संक्रमण के आंकड़ों को छिपाने का यह तरीका अपना रही है सरकार
Photo Courtesy: The Indian Express

भोपाल। राजधानी भोपाल में रोज़ाना कोरोना के 500 के करीब मामले आ रहे हैं। लेकिन अगर कोरोना की जांच सही से होने लगे तो यह आंकड़ा रोज़ाना के स्तर पर और भी बढ़ सकता है। एक हिंदी अख़बार ने अपनी एक रिपोर्ट में छापा है कि शहर में कोरोना से संक्रमित होने वाले मरीजों की संख्या कम दिखे, इसलिए एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में कोरोना के मरीजों की संख्या कम आए इसलिए कोरोना के ऐसे मरीज़ जिनकी सीटी वैल्यू 30 से 40 के बीच उनकी रिपोर्ट निगेटिव बताई जा रही है। 

अगर आप मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रहते हैं तो ऐसा हो सकता है कि आप कोरोना से संक्रमित हों लेकिन आपकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ जाए। दरअसल आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक जिन लोगों की कोरोना रिपोर्ट में सीटी वैल्यू 40 से कम है, ऐसे मरीजों को कोरोना पॉज़िटिव माना जाना चाहिए। पूरे देश में कोरोना की रिपोर्ट इसी आधार पर तैयार की जा रही है, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐसा नहीं हो रहा है। 

उदाहरण के तौर पर 24 मार्च को एक 70 वर्षीय व्यक्ति ने भोपाल के जेके अस्पताल में अपनी कोरोना जांच कराई थी। रिपोर्ट में व्यक्ति की सीटी वैल्यू 30 से ऊपर थी, लेकिन इनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बताई गई है। कुछ ऐसा ही 60 वर्षीय एक व्यक्ति के साथ भी हुआ है। उनकी रिपोर्ट में सीटी वैल्यू 31.32 थी। लेकिन उनकी भी रिपोर्ट निगेटिव दी गई। ऐसे कई मामले हैं जिसमें व्यक्ति की सीटी वैल्यू 30 से ऊपर होने के बावजूद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक यह सारा खेल स्वास्थ्य विभाग और ज़िला प्रशासन के मौखिक आदेश पर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग और ज़िला प्रशासन ने शहर में कोरोना के मामले कम आने के लिए यह मौखिक आदेश दिया है। हालांकि इस आरोप को लेकर जब भोपाल कलेक्टर से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी भी मौखिक आदेश से इंकार कर दिया। अविनाश लवानिया ने कहा कि अगर हमने ऐसा कोई मौखिक आदेश दिया होता तो कोरोना के मामले और काम आते। 

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दरअसल सीटी वैल्यू यानी साइकिल थ्रेशोल्ड वैल्यू किसी व्यक्ति के शरीर में वायरस के लोड को बताने का पैमाना है। होशंगाबाद रोड पर स्थित एक थायरोकर सेंटर को स्वास्थ्य विभाग ने 30 मार्च को सील कर दिया। इस सेंटर पर 40 से कम सीटी वैल्यू के मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आती थी। यहां से कोरोना टेस्टिंग का सैंपल महाराष्ट्र जाता था, इसलिए सीटी वैल्यू 30 से ऊपर रहने पर रिपोर्ट पॉज़िटिव बताई जाती थी।