जहां तक नजर जाती है उजड़े गांव और बदहाल लोग नजर आते हैं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से वापस लौटे दिग्विजय सिंह ने लिखा सीएम को पत्र

बाढ़ प्रभावितों का राहत व पुनर्वास पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ तय सीमा में हो, साथ ही मकान बनाने के लिए 1 लाख 20 हज़ार  की जगह ढाई लाख रुपए दे सरकार: दिग्विजय सिंह

Updated: Aug 17, 2021, 04:31 PM IST

जहां तक नजर जाती है उजड़े गांव और बदहाल लोग नजर आते हैं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से वापस लौटे दिग्विजय सिंह ने लिखा सीएम को पत्र

भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब आधा दर्जन जिलों में इस महीने के शुरुआत में बारिश के बाद उत्पन्न हुई बाढ़ की स्थिति ने रहवासियों को खासा नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ग्रस्त जिलों में स्थिति का जायजा व नुकसान का आंकलन कर वापस लौटे दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को आंखों देखा मंजर बताया है। राज्यसभा सांसद ने इस विभीषिका को बयां करते हुए बताया है कि जहां तक नजर जाती है उजड़े गांव और बदहाल लोग ही नजर आते हैं। उन्होंने कहा है कि पीड़ितों के जख्म बहुत गहरे हैं। कांग्रेस नेता ने मांग की है कि पीड़ितों को मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए दिए जाएं।

दरअसल, राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह बीते दिनों मध्यप्रदेश के गवालियर-चम्बल संभाग में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने बाढ़ की वजह से होने वाली हानि को बड़े नज़दीक से देखा। श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड व दतिया जिलों में 4 दिवसीय दौरे के बाद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा बाढ़ पीड़ितों का हाल बयां किया है। उन्होंनेे बताया है कि बाढ़ में लोगों के घर में रखा सारा अनाज बह गया। यहां तक कि बाढ़ पीड़ित पहनने, ओढ़ने, बिछाने तक के कपड़े व घर गृहस्थी के सामान ले लिए दूसरों के मोहताज हैं।

सबकुछ खत्म होने जैसे हालात हैं: दिग्विजय सिंह

सीएम को संबोधित पत्र में कांग्रेस नेता ने लिखा कि, 'अनेक गांव, कस्बे, टोले-मंजरे सहित हजारों परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। श्योपुर और भिण्ड जिलों के अनेक गांवों में सब कुछ खत्म होने जैसे हालात हैं। ग्वालियर, दतिया और शिवपुरी में भी असीमित जन-धन की हानि हुई है। लेकिन तबाह हुए इन गांवों में राहत राशि तो दूर प्रभावितों का सर्वे भी नहीं हो पाया। महिलाएं, बच्चे और बूढ़े भूखे भटकते रहे पर जिला प्रशासन ने राहत कैम्प तक नहीं चलाया। विभिन्न संस्थाएँ और समाजसेवी यदि लोगों की मदद करने के लिए आगे नहीं आती तो लोग भूख से मर जाते। पीड़ितों से मुलाकात के बाद शासन और प्रशासन द्वारा की गई लापरवाही साफ नजर आ रही है।'

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पूर्व सीएम ने बताया है कि एक ओर रबी की फसल में मेहनत मजदूरी कर सालभर के लिए एकत्र किया गया अनाज बह गया, वहीं दूसरी तरफ लगभग हर परिवार से पालतू मवेशी गाय, भैंस, बैल, बकरी, मुर्गा-मुर्गी बह गए। इस संकट में फंसे लोगों से पशुओं की पोस्टमार्टम रिर्पोट मांगी जा रही है।' कांग्रेस नेता ने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर पशुपालकों को तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए। सिंह के मुताबिक ग्वालियर, चंबल संभाग में हजारों परिवारों के मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुके हैं। उन्होंने ऐसे सभी गांवों में नये सिरे से काॅलोनी बनाकर लोगों के पुनर्वास की मांग की है। साथ ही कहा है कि मकान बनाने के लिए उन्हें एक लाख 20 हजार रुपए के जगह ढाई लाख रुपए दिए जाएं।

डैम के 12 गेट एकसाथ खोलने की वजह से आई अचानक बाढ़

दिग्विजय सिंह ने बाढ़ के कारणों को लेकर कहा है कि एक साथ मड़ीखेड़ा डैम के 12 गेट खोलने की वजह से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई जिससे गांवों में पानी घुस गया और सब कुछ बहा ले गया। हजारों परिवारों को सदा के लिये बर्बाद कर गया। उन्होंने इस लापरवाही के लिए जल संसाधन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस नेता ने पांच जिलों के 6 बड़े पुलों के टूटने को लेकर भी सवालिया निशान खड़ा किया है। उन्होंने कहा, 'दतिया में रतनगढ़ का पुल तो 7 साल पुराना ही था, ऐसे गुणवत्ता विहीन पुलों के निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। सिंह ने यह भी कहा है कि इन जिलों के अनेक राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और अन्य सड़कें बह गई। इन सड़कों के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की विशेष जांच दल गठित कर जांच कराई जानी चाहिए।

आवश्यक डॉक्युमेंट्स बनाने के लिए शिविर लगाएं: दिग्विजय सिंह

कांग्रेस नेता ने लोगों की आ रही एक और बड़ी समस्या के बारे में बताया है कि बाढ़ के कारण लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड, मनरेगा का जाॅब कार्ड, जमीन की बही, रजिस्ट्री की कापी आदि महत्वपूर्ण दस्तावेज बर्बाद हो गए। उन्होंने सभी प्रभावित ग्रामों में विशेष शिविर लगाकर इन डॉक्युमेंट्स को पुनः तैयार करवाने की मांग की है। पत्र के आखिर में सिंह ने लिखा है कि प्रभावितों के जख्म बहुत गहरे हैं। राहत व पुनर्वास का काम पूरी ईमानदारी व ’समयसीमा’ में तय कर सरकार संवेदनशीलता का परिचय दे। यदी नियमों में बदलाव की भी जरूरत पड़ती है तो संशोधन कर पीड़ित परिवार के आंसू पोंछे जाने चाहिए।