जूनियर डॉक्टरों को हक़ मांगने की सजा, सरकार ने रोका पंजीयन, तो हड़ताल पर गए MP के 3 हजार डॉक्टर्स

डेंगू और वायरल फीवर के मौसम में हड़ताल पर गए मध्य प्रदेश के 3 हजार जूनियर डॉक्टर्स, ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बाधित, रजिस्ट्रेशन होल्ड करने के आदेश को वापस लेने की मांग

Updated: Sep 08, 2021, 01:36 PM IST

जूनियर डॉक्टरों को हक़ मांगने की सजा, सरकार ने रोका पंजीयन, तो हड़ताल पर गए MP के 3 हजार डॉक्टर्स

भोपाल। डेंगू और सीजनल फ्लू के बढ़ते कहर के बीच मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। प्रदेश के 3 हजार जूनियर डॉक्टर्स बुधवार से हड़ताल पर चले गए। जुडा के हड़ताल की वजह से प्रदेश भर के अस्पतालों में इलाज के अभाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हॉस्पिटल्स में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं पूर्ण रूप से बाधित हुई हैं।

दरअसल, जुलाई के महीने में मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने व्यापक विरोध प्रदर्शन और हड़ताल किया था। इस दौरान प्रदेश भर में मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। जूडा का यह हड़ताल अपनी मांगों को लेकर था। हड़ताल को दबाने के लिए राज्य सरकार ने जूडा के पदाधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते हुए मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन रोकने की धमकी थी।

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मध्य प्रदेश जूडा के खिलाफ सरकार के रवैए ने देशभर के डॉक्टरों को आक्रोशित कर दिया था और राजधानी दिल्ली समेत कई जगहों पर रेजिडेंट डॉक्टरों ने जूडा के समर्थन में मार्च निकाला था। हालांकि, मामले में हाईकोर्ट के दखल के बाद जूडा ने अपना हड़ताल वापस ले लिया था और सभी डॉक्टर काम पर चले गए थे। इस दौरान राज्य सरकार ने जूडा को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय लेगी।

जुडा द्वारा हड़ताल वापस लेने के बाद भी प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। अब मामला ये है कि नोटिस का जवाब देने के बावजूद भी उनके रजिस्ट्रेशन पर सरकार ने रोक लगा दी है। जिन पदाधिकारियों का पंजीयन रोका गया है, उसमें जूडा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष डा अरविंद मीणा, जीएमसी जूडा अध्यक्ष डा हरीश पाठक और डॉ शुभम चौरसिया शामिल हैं।

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मामले में जूडा लगातार चिकित्सा मंत्री से मिलने की मांग कर रही है साथ ही रजिस्ट्रेशन शुरू करने का निवेदन किया है। बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार के इस रवैये से मजबूर होकर प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर, रीवा और सागर के 3 हजार जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं।

जूडा का कहना है कि सरकार यह कार्रवाई डॉक्टरों को डराने के लिए कर रही है ताकि भविष्य में जूडा के लोग अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन भी न कर सकें। जूडा का कहना है कि कोरोना संकट काल में हम अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सांसें रोकने के लिए दिन-रात लगे रहे। लेकिन सरकार इसका उपहार स्वरूप परेशान करने में लगी हुई है।