अछूत बता कर वाल्मीकि समाज को मैरिज गार्डन देने से इनकार, पीड़ितों ने धर्म परिवर्तन की दी चेतावनी

पीड़ित अमर घावरी का आरोप कि मैरिज गार्डन के संचालकों ने शादी के लिए उन्हें मैरिज गार्डन सिर्फ इसलिए नहीं दिया, क्योंकि वे वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखते हैं, अमर घावरी ने शिवपुरी प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जाति के नाम पर भेदभाव करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शादी के बाद 200 लोगों के साथ धर्म परिवर्तन कर लेंगे

Publish: Dec 17, 2021, 04:31 PM IST

अछूत बता कर वाल्मीकि समाज को मैरिज गार्डन देने से इनकार, पीड़ितों ने धर्म परिवर्तन की दी चेतावनी

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में जाति के आधार पर एक परिवार को मैरिज गार्डन नहीं देने का मामला सामने आया है। ज़िले के पछोर गांव के रहने वाले परिवार को तमाम मैरिज गार्डन संचालकों ने सिर्फ इसलिए मैरिज गार्डन देने से इनकार कर दिया क्योंकि परिवार तथाकथित निम्न जाति से ताल्लुक रखता है। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में स्थानीय प्रशासन से शिकायत दर्ज करायी है। पीड़ित परिवार ने यह धमकी भी दी है कि अगर इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो शादी के बाद समाज के करीब 200 लोग धर्म परिवर्तन कर लेंगे। 

वाल्मीकि समाज से ताल्लुक रखने वाले अमर घावरी की चचेरी बहन की 16 दिसंबर को सगाई होनी थी। इसके लिए परिवार ने मैरिज गार्डन बुक करने की सोची। लेकिन एक भी मैरिज गार्डन में वे बुकिंग नहीं करवाए पाये। इसके पीछे वजह यह थी कि खुद मैरिज गार्डन के संचालक उन्हें मैरिज गार्डन किराये पर नहीं देना चाहते थे। मैरिज गार्डन के संचालकों का कहना था कि वे लोग अछूत हैं, इसलिए अगर उन लोगों को मैरिज गार्डन दिया गया तो उच्च जाति के लोग मैरिज गार्डन में बुकिंग नहीं कराएंगे।  

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मैरिज गार्डन के इस भेदभावपूर्ण रवैये के बाद अमर सिंह घावरी की चचेरी बहन की सगाई घर पर ही संपन्न हुई। लेकिन दूसरी तरफ पीड़ित परिवार ने मैरिज गार्डन के संचालकों के विरुद्ध स्थानीय प्रशासन में शिकायत दर्ज करायी है। पीड़ित परिवार ने एसडीएम से की अपनी शिकायत में कहा है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो करीब 200 की संख्या में वे लोग धर्म परिवर्तन कर लेंगे। 

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अमर घावरी ने मीडिया से कहा है कि जनवरी 2022 में उनकी बहन की शादी होनी है। इस बीच अगर प्रशासन ने मैरिज गार्डन संचालकों के विरुद्ध कदम नहीं उठाये तो वे खुद और उनके समाज के करीब 200 लोग धर्म परिवर्तन कर लेंगे। अमर घावरी का कहना है कि ऐसे धर्म में रहने के क्या मतलब जहां आज़ादी के सत्तर साल बाद भी एक समाज जाति का दंश झेलने पर मजबूर होना पड़े। घावरी ने कहा कि हम ऐसे धर्म में जाना मुनासिब समझेंगे जहां जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव न होता हो।