जेपी अस्पताल में मरीज़ की मौत पर परिजनों का आरोप, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से गई जान

शुक्रवार शनिवार की दरमियानी रात को तख्त सिंह शाक्य नामक व्यक्ति को भर्ती कराया गया था, परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज़ का ऑक्सीजन मास्क भी हटा दिया था

Publish: Apr 11, 2021, 08:48 AM IST

जेपी अस्पताल में मरीज़ की मौत पर परिजनों का आरोप, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से गई जान

भोपाल। शनिवार देर रात भोपाल के जेपी अस्पताल में भर्ती एक मरीज़ की मौत हो गई। मरीज़ की मौत पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण ही मरीज़ की जान गई है। अस्पताल प्रबंधन लगातार इलाज करने से बच रहा था और मरीज़ को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए दबाव बना रहा था। इन सबके बीच मरीज़ का इलाज करने वाले डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है। 

भोपाल के ही भीम नगर में रहने वाले तख्त सिंह शाक्य को शुक्रवार शनिवार की दरमियानी रात को परिजनों से जेपी अस्पताल में भर्ती कराया था। 40 वर्षीय तख्त सिंह शाक्य को सांस लेने में तकलीफ़ हो रही थी। हालांकि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी। करीब 12.30 बजे परिजन मरीज़ को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर लगातार मरीज़ का इलाज करने से मना कर रहे थे। अस्पताल प्रबंधन मरीज़ को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए दबाव बना रहे थे। परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाया कि डॉक्टरों मरीज़ का ऑक्सीजन मास्क भी हटा दिया। जिस वजह मरीज़ की मौत हो गई। 

मरीज़ की मौत के बाद शनिवार को पूरे दिन अस्पताल में हंगामा मचा रहा। मरीज़ का इलाज करने वाले डॉक्टर योगेंद्र श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया। योगेंद्र श्रीवास्तव ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि मुझे गालियां खा कर नौकरी नहीं करनी। 

दरअसल मरीज़ की मौत की सूचना मिलने पर कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा भी अस्पताल पहुंचे थे। वे लगातार इस मामले में डॉक्टर से बात करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन डॉक्टर बात करने के लिए तैयार ही नहीं थे। इसी बीच पीसी शर्मा के समर्थकों और डॉक्टर के बीच नोकझोंक भी हुई। पीसी शर्मा ने इस मामले पर कहा है कि राजधानी के हमीदिया और जेके अस्पताल सहित अधिकतर अस्पतालों में नहीं यही हालात हैं। मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है। हम सिर्फ यह जानने पहुंचे थे कि मरीज़ को जेपी अस्पताल न लेकर आए जाए, तो कहां ले जाया जाए।