मध्य प्रदेश की सहरिया जनजाति में तेजी से फैल रही है टीबी की बीमारी, आईसीएमआर रिपोर्ट में खुलासा

आईसीएमआर यानी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में काम करनेवाली संस्था की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि आर्थिक रुप से कमजोर होने के कारण प्रदेश के सहरिया आदिवासियों में ट्यूबरकुलोसिस की बीमारी तेज़ी से बढ़ी है.. पर्याप्त पोषण आहार की कमी इसकी बड़ी वजह बतायी गयी है

Updated: Nov 16, 2022, 09:56 PM IST

मध्य प्रदेश की सहरिया जनजाति में तेजी से फैल रही है टीबी की बीमारी, आईसीएमआर रिपोर्ट में खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश में जब आदिवासी समाज की संस्कृति और अधिकार को लेकर सरकार और विपक्ष पूरे जोरशोर से अपना वोटबैंक मजबूत करने में लगे हैं, ठीक उसी समय आईसीएणआर की एक रिपोर्ट ने सबको चौंकाया है। ताज़ा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि राज्य की सहरिया जनजाति बुरी तरह से ट्यूबरकुलोसिस की बीमारी से ग्रस्त है।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 7 जिलों में सहरिया जनजाति के लोग टीबी रोग से सबसे ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं। इनमें श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, ग्वालियर, भिंड और मुरैना है। राज्य के सुदूर पिछड़े इलाके में रहनेवाली सहरिया जनजाति सामाजिक आर्थिक स्तर पर भी सबसे ज्यादा पिछड़ी है। यही वजह है कि टीबी ने उनके शरीर में अपना घर बना लिया है।

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टीबी को खत्म करने के लिए श्योपुर जिले में इस साल की शुरुआत से ही पायलट प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट की हकीकत चौंकाने वाली है। आईसीएमआर की ओर से जब श्योपुर जिले में 5 हजार लोगों की जांच की गई तो उनमें से 507 लोग टीबी के रोगी मिले। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस राज्य सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस ने एक ट्वीट में लिखा है कि, 'मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर संकट, प्रदेश की सहरिया जनजाति के लोग टीबी रोग की चपेट में, सरकार इवेंटबाजी में मस्त; शिवराज जी, मदमस्त नींद से कब जागोगे?' 

सहरिया जनजाति में टीबी होने के तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। इनमें से पहला है पर्याप्त पोषण आहार नहीं मिलना। दूसरा रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना। दोनों ही चीजें आर्थिक पिछड़ेपन से जुड़ी हैं। गरीबी के कारण इन्हें पर्याप्त पोषण आहार नहीं मिल पाता और उनकी इम्यूनिटी भी काफी कमजोर हो जाती है।

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इस जनजाति में टीबी होने का दूसरा कारण ये है कि ये लोग बीड़ी और शराब का अत्यधिक सेवन करते हैं। इसके अलावा ज्यादातर परिवार एक कमरे के घर में रहते हैं, क्योंकि उनके पास घर बनाने के लिए पैसे नहीं होते। इसलिए यदि परिवार में किसी एक को यह बीमारी होती है तो वो जल्द ही बाकी में भी फैल जाती है। जबकि डॉक्टरी सलाह के मुताबिक टीबी एक संक्रामक बीमारी की तरह है और अपने आसपास के लोगों को तेज़ी से अपने चपेट में कर लेती है।

मामला सामने आने पर राज्य सरकार ने इससे जल्द निजात दिलाने का दावा किया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया के सवाल पर कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकार यह अभियान चला रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि टीबी बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए। इसके लिए आईसीएमआर की रिपोर्ट का भी हम अध्ययन करेंगे।