ब्यूरोक्रेसी की औकात क्या है, वो तो हमारे चप्पल उठाती है, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का विवादित बयान

उमा भारती ने कहा हमसे हकीकत पूछो, हम मुख्यमंत्री रहे हैं, केंद्र में मंत्री रहे हैं, हमें पता है कि ब्यूरोक्रेसी की औकात क्या है

Updated: Sep 24, 2021, 05:45 PM IST

ब्यूरोक्रेसी की औकात क्या है, वो तो हमारे चप्पल उठाती है, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का विवादित बयान

भोपाल। अपने विवादित बयानों से अमूमन मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाली उमा भारती ने ऐसा बयान दे डाला है, जो की उनकी ही पार्टी के लिए गले की फांस बन सकता है। उमा भारती ने नौकरशाही को लेकर कहा है कि वह नेताओं की चप्पल उठाती है। उसकी कोई औकात नहीं है। उमा भारती के इस बयान पर जल्द ही विवाद बढ़ने वाला है। 

उमा भारती ने यह बात शनिवार को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए कही। उमा भारती ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी की क्या औकात है, वह तो हमारे चप्पल उठाती है। उमा भारती ने कहा कि आपको क्या लगता है? ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है? नहीं, पहले बात हो जाती है, इसके बाद ब्यूरोक्रेसी फाइल बनाकर लाती है। 

उमा भारती यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने खुद का और अपनी सरकार का पर्दाफाश करते हुए कहा कि हमसे पूछिए, ग्यारह साल तक मंत्री रहे हैं, मुख्यमंत्री भी रहे हैं। इनकी आखिर औकात क्या है? उनको वेतन हम दे रहे हैं, प्रमोशन हम दे रहे हैं। उमा भारती ने कहा कि असल बात तो यह है कि हम ब्यूरोक्रेसी के बहाने अपनी राजनीति साधते हैं। 

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हालांकि यह पहली बार नहीं है जब नौकरशाहों को लेकर इस तरह के विवादित बयान दिए गए हों। खुद प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सत्ता जाने के बाद भरी सभा में छिंदवाड़ा कलेक्टर के लिए अभद्र भाषा का उपयोग करते देखे जा चुके हैं। अप्रैल 2019 में छिंदवाड़ा में एक सभा में शिवराज सिंह चौहान मंच से यह कहते हुए सुनाई दिए थे, ए पिट्ठू कलेक्टर सुन ले रे, हमारे भी दिन जल्द आएंगे, तब तेरा क्या होगा? 

नौकरशाहों को लेकर ऐसे अनगिनत बयान बीजेपी नेताओं की ओर से दिए जा चुके हैं। खुद डबरा विधानसभा सीट से पिछले उपचुनाव में बीजेपी की प्रत्याशी रहीं इमरती देवी ने कहा था कि हम जिस कलेक्टर को फोन करेंगे वह सीट जितवा देगा। लंबे अरसे तक बीजेपी का हिस्सा रहीं उमा भारती के ताजा बयानों को इस बात की पुष्टि माना जा रहा है, किस कदर बीजेपी के शासन में नौकरशाही राजनीतिक दबाव में आकर काम करने पर मजबूर हो जाती है।