Kapil Sibal: बिना इजाज़त लाल किले तक पहुंचना नामुमकिन, किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ हुई साज़िश

कांग्रेस ने दिल्ली हिंसा के लिए एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा,पार्टी का आरोप है कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा केंद्र सरकार की साजिश का नतीजा थी

Updated: Jan 30, 2021, 03:03 PM IST

Kapil Sibal: बिना इजाज़त लाल किले तक पहुंचना नामुमकिन, किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ हुई साज़िश
Photo Courtesy : Times Of India

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के लिए पूरी तरह से मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। सिब्बल ने गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने की घटना के लिए भी केंद्र सरकार को कसूरवार ठहराया है। उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 26 जनवरी को जो कुछ भी हुआ वो केंद्र सरकार की सोची समझी साजिश का नतीजा था।  

बिना इजाज़त के लाल किले तक पहुंचना मुमकिन नहीं : कपिल सिब्बल 

कपिल सिब्बल ने कहा है कि बिना अनुमति के लाल किले तक कोई नहीं पहुँच सकता। सिब्बल ने कहा कि यह सब आंदोलन को ख़त्म करने की साजिश के तहत किया गया। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक सिब्बल ने कहा, 'बिना इजाजत के कोई लाल किले में नहीं पहुंच सकता। वे लोग सीधे लाल किले तक चले गए और खुद कह रहे हैं कि हमें किसी ने नहीं रोका। आंदोलन को तोड़ने के लिए कई षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।' 

कांग्रेस पार्टी गणतंत्र दिवस की घटना के बाद से ही केंद्र सरकार पर हमला बोल रही है। राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और रणदीप सुरजेवाला सहित तमाम कांग्रेस नेता इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार की साजिश बता चुके हैं। इसी कड़ी में कपिल सिब्बल ने भी कृषि कानूनों के विरोध और किसानों के समर्थन में अपनी बात रखी है।

गणतंत्र दिवस की घटनाओं के बाद किसान आंदोलन के कमज़ोर पड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन पिछले दो दिनों में आंदोलन के प्रति समर्थन कम होने की जगह बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजित सिंह खुलकर किसानों का समर्थन कर रहे हैं। उनके बेटे जयंत चौधरी किसानों के धरने और महापंचायत में शामिल हो चुके हैं। इसी तरह  बीजेपी के पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने बिक्रम मजीठिया ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से किसानों के समर्थन में दिल्ली पहुंचने को कहा है। मजीठिया ने यह भी कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता भी बॉर्डर पर पहुंचेंगे। आंदोलन में शामिल किसान भी हिंसा के आरोपों का जवाब देने और शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का इजहार करने के लिए आज महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर उपवास कर रहे हैं।