राज्यसभा में गूंजा पत्रकारों पर FIR का मुद्दा, दिग्विजय सिंह बोले स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की आवश्यकता

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में उठाया नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किए जाने का मुद्दा, बोले, असहमति की आवाज़ दबाने की हो रही है साज़िश

Updated: Feb 04, 2021, 01:14 PM IST

राज्यसभा में गूंजा पत्रकारों पर FIR का मुद्दा, दिग्विजय सिंह बोले स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की आवश्यकता

नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राजनेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला संसद में उठाया है। उन्होंने किसान  राज्यसभा में यह मसला उठाते हुए आरोप लगाया कि एक साजिश के तहत असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जा रही है। 

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'पिछले कुछ दिनों से राजनीतिज्ञों के खिलाफ, पत्रकारों के खिलाफ और सिविल सोसाइटी एक्टिविस्टों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा रही है। संसद सदस्य शशि थरूर, पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडेय, मंदीप पूनिया व अन्य कई व्यक्तियों पर सेडिशन (राजद्रोह) का प्रकरण दर्ज किया गया है।

अंग्रेजों ने महात्मा गांधी, भगत सिंह पर ऐसे ही मुकदमे दर्ज किए थे: दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने राजद्रोह को अंग्रेजी हुकूमत का हथियार करार देते हुए कहा, 'ये अंग्रेजों के जमाने का कानून है जिसे महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह, अशफाकउल्ला खान जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा चुका है। एक ही तरह की शिकायत पर तीन-तीन राज्यों के अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिसका कंटेंट बिलकुल एक जैसा है।  

यह स्वतंत्र आवाजों को दबाने का षड्यंत्र : दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने कहा, 'यह स्वतंत्र पत्रकारिता और स्वतंत्र आवाजों को दबाने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। हम इसकी निंदा करते हैं।' कांग्रेस नेता ने गृह मंत्री अमित शाह से इन प्रकरणों को वापस लिए जाने की मांग की। उन्होंने कहा है कि स्वतंत्र पत्रकारिता देश के लोकतंत्र की आवश्यकता है।

दरअसल 26 जनवरी को आंदोलन के दौरान एक किसान की मौत हो गई थी। शुरुआत में मौके पर मौजूद लोगों ने दावा किया कि किसान की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। सोशल मीडिया पर यह समाचार तेजी से फैल गया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स को आधार बनाते हुए कई लोगों ने इस जानकारी को शेयर कर दिया। बाद में पुलिस ने वीडियो जारी करके बताया कि किसान की मौत ट्रैक्टर पलटने से हुई है।

इसी मामले में कांग्रेस नेता शशि थरूर, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, नेशनल हेराल्ड की वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार मृणाल पांडे, कौमी आवाज उर्दू समाचार पत्र के मुख्य संपादक जफर आगा, कारवां पत्रिका के मुख्य संपादक परेशनाथ, अनंतनाथ, विनोद के जोस समेत अन्य लोगों खिलाफ देशद्रोह और दंगा भड़काने जैसे संगीन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। ये एफआईआर भी एक जगह नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग इलाकों के कई थानों में दर्ज की गई है।

स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को पुलिस ने उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वो किसानों के आंदोलन की रिपोर्टिंग करने  सिंघु बॉर्डर पर गए थे। कई दिनों बाद मनदीप को कोर्ट से जमानत मिली तब उन्हें छोड़ा गया। मनदीप ने जेल से बाहर आने के बाद आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी बेरहमी से पिटाई की। गिरफ्तारी से पहले मनदीप ने अपने फेसबुक लाइव में बताया था कि सिंघु बॉर्डर पर किसानों पर हमला करने आई भीड़ पुलिस की मौजूदगी में मनमानी करती रही। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि इस भीड़ में शामिल लोग कौन हैं और उनके संबंध किन संगठनों से हैं।