Arnab Goswami Case: सुप्रीम कोर्ट में अर्णब गोस्वामी की अर्जी की जल्द सुनवाई पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने पूछा, अर्णब की अर्जी को इतनी जल्दी क्यों लिस्ट किया गया, जबकि ऐसे कई मामलों को लिस्टिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है

Updated: Nov 11, 2020, 04:30 PM IST

Arnab Goswami Case: सुप्रीम कोर्ट में अर्णब गोस्वामी की अर्जी की जल्द सुनवाई पर उठे सवाल
Photo Courtesy: Navbharat Times

नई दिल्ली। रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई किए जाने पर सीनियर वकील और सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री ऑफिस को बेहद कड़े शब्दों में एक चिट्ठी भी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने पूछा है कि जब सुप्रीम कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग के लिए कंप्यूटराइज़्ड सिस्टम काम करता है, तो अर्णब के मामले में अर्जेंट सुनवाई किस आधार पर दी जाती है। उन्होंने पूछा है कि क्या चीफ जस्टिस के विशेष निर्देश पर ऐसा किया जा रहा है?

दवे ने चिट्ठी में लिखा है कि अर्णब ने सुनवाई के लिए जो अर्जी लगाई थी उसे फौरन लिस्ट कर दिया गया। जबकि इस तरह के कई मामलों को सुनवाई की लिस्टिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने सक्रेटरी जनरल से पूछा कि क्या चीफ जस्टिस एस.ए बोबडे ने अर्णब से जुड़े मामलों में फौरन सुनवाई के लिए विशेष निर्देश दे रखे हैं और अगर ऐसा नहीं है तो अर्णब को यह विशेष सहूलियत कैसे मिल रही है।

दवे ने अपनी चिट्ठी में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के महीनों जेल में रहने का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पी चिंदंबरम जैसे वरिष्ठ वकील की याचिका की भी तत्काल लिस्टिंग नहीं हो सकी थी। जिस वजह से उन्हें महीनों जेल में रहना पड़ा था, जब तक कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लायक घोषित नहीं किया।

उन्होंने चिट्ठी में लिखा, ‘ मेरा अर्णब गोस्वामी से निजी तौर पर कोई विरोध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के याचिका पर सुनवाई करने के अधिकार में हस्तक्षेप करने का भी मेरा कोई इरादा नहीं है।अर्णब को भी सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की मांग करने का उतना ही अधिकार जितना किसी भी अन्य नागरिक को है। मैं यह पत्र सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की हैसियत से जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच में सुनवाई के लिए याचिका की तत्काल लिस्टिंग के बारे में विरोध जाहिर करने के लिए लिख रहा हूं।’

दुष्यंत दवे ने अपने पत्र में पूछा कि जब लिस्टिंग के लिए कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसमें काम ऑटोमैटिक लेवल पर होता है तो इस तरह से सेलेक्टिव लिस्टिंग क्यों हो रही है। क्या इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश और रोस्टर मास्टर ने कुछ विशेष निर्देश दे रखे हैं। दवे का कहना है कि अर्नब गोस्वामी की याचिका की तत्काल लिस्टिंग आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग है, जिससे समाज में एक अच्छा मैसेज नहीं जा रहा है।