हेलीकॉप्टर क्रैश: जल्द सुलझेगी हादसे की गुत्थी, स्पेशल टीम ने ढूंढ निकाला ब्लैक बॉक्स, जानें क्या है ये बॉक्स

ब्लैक बॉक्स में रिकॉर्ड होता है कॉकपिट में बातचीत का डेटा, घटनास्थल से वायु सेना की टीम ने ढूंढा हेलीकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स, दुर्घटना में जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोगों की हुई है मौत

Updated: Dec 09, 2021, 12:39 PM IST

हेलीकॉप्टर क्रैश: जल्द सुलझेगी हादसे की गुत्थी, स्पेशल टीम ने ढूंढ निकाला ब्लैक बॉक्स, जानें क्या है ये बॉक्स
Photo Courtesy: Deccan Herald

नई दिल्ली। तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार को दुर्घटना ग्रस्त हेलीकॉप्टर MI-17 V5 का ब्लैक बॉक्स मिल गया है। वायु सेना की स्पेशल टीम ने गुरुवार को क्रैश के मलबे से ब्लैक बॉक्स को ढूंढ निकाला है। ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद अब माना जा रहा है कि जल्द ही हादसे के कारणों का पता चल सकेगा।

आधिकारिक सूत्रों ने के मुताबिक बुधवार को ब्लैक बॉक्स नहीं मिलने के बाद तलाश का दायरा दुर्घटनास्थल से 300 मीटर दूर से बढ़ाकर एक किलोमीटर तक कर दिया था। जिसके बाद गुरुवार सुबह इसे बरामद कर लिया गया। जानकारी के मुताबिक ब्लैक बॉक्स ढूंढने के लिए विंग कमांडर आर भारद्वाज की अगुवाई में वायुसेना के  25 सदस्यों की एक स्पेशल टीम को घटनास्थल पर भेजा गया था।

कॉकपिट की बातचीत रिकॉर्ड करता है ब्लैक बॉक्स

एयरक्राफ्ट के साथ हुई किसी भी दुर्घटना का पता लगाने के लिए अक्सर ब्लैक बॉक्स का उपयोग किया जाता है। ये बॉक्स उड़ान के दौरान न सिर्फ जहाज की सारी गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है बल्कि क्रैश के कुछ सेकंड पहले तक कॉकपिट में हो रही बातचीत को भी रिकॉर्ड करता है। इसे फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) भी कहते हैं।

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1950 के दशक में जब एयरक्राफ्ट दुर्घटना की संख्या अधिक हो गई थी तब इसे बनाया गया था। उस दौरान लाल रंग होने के कारण इसे रेड एग कहा जाता था। हालांकि, इसका भीतरी लेयर काले रंग के होने की वजह से बाद में यह ब्लैक बॉक्स के नाम से जाना जाने लगा। इस बक्से को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत धातु टाइटेनियम से बनाया जाता है। इसके अंदर इस प्रकार की सुरक्षित दीवारें बनी होती हैं कि दुर्घटना के दौरान भले ही प्लेन के सारे पुर्जे बर्बाद हो जाएं लेकिन ब्लैक बॉक्स सुरक्षित रहता है और उससे पता चलता है कि आखिर दुर्घटना क्यों हुई?

रंग लाल, नाम ब्लैक बॉक्स

ब्लैक बॉक्स का बाहरी हिस्सा आमतौर पर लाल या गुलाबी रंग का रखा जाता है, ताकि झाड़ियों या धूल-मिट्टी में गिरने के बावजूद रंग के कारण ये दूर से दिख जाए। प्लेन में भीषण आग लगने की स्थिति में भी इसके खत्म होने की आशंका लगभग नहीं के बराबर होती है, क्योंकि लगभग 1 घंटे तक ये 10 हजार डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान सह सकता है। इसके बाद अगले 2 घंटों तक ये बॉक्स करीब 260 डिग्री तापमान सह सकता है। 

इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह मशीन महीनेभर तक बिना बिजली के भी काम करने में सक्षम होता है। यानी अगर दुर्घटनाग्रस्त जहाज को खोजने में वक्त लग जाए तो भी बॉक्स में डाटा सेव रहता है। इतना ही नहीं इस बॉक्स से लगातार एक तरह की आवाज निकलती है, जो सैन्य अधिकारियों द्वारा दूर से ही पहचानी जा सकती है। यहां तक कि समुद्र में 20,000 फीट तक नीचे गिरने के बाद भी इस बॉक्स से आवाज और तरंगें निकलती रहती हैं जो लगातार 30 दिनों तक जारी रहती हैं।