आर्टिकल 370 हटने के बाद एक भी बाहरी व्यक्ति ने नहीं खरीदा कश्मीर घाटी में प्लॉट: गृह मंत्रालय

आर्टिकल 370 हटाने के दौरान सरकार ने कहा था कि इससे कश्मीर में निवेश आएगा और बाहरी लोग जमीन भी खरीदेंगे, हालांकि डेटा बताता है की ढाई साल बीतने के बाद भी किसी ने जमीन नहीं खरीदा

Updated: Dec 16, 2021, 10:47 AM IST

आर्टिकल 370 हटने के बाद एक भी बाहरी व्यक्ति ने नहीं खरीदा कश्मीर घाटी में प्लॉट: गृह मंत्रालय

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटे करीब ढाई साल हो गया है। फैसले को सही ठहराने के लिए केंद्र सरकार ने इससे जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग भी यहां ज़मीन खरीद सकेंगे और कश्मीर घाटी में निवेश बढ़ेगा। केंद्र सरकार ने अब बताया कि कश्मीर घाटी में आर्टिकल 370 हटने के बाद से एक भी बाहरी व्यक्ति ने प्लॉट नहीं खरीदा है। यानी आर्टिकल 370 के हटने के बाद भी घाटी में प्लॉट की खरीददारी जीरो है।

दरअसल, सीपीएम सांसद झरना दास बैद्य ने राज्यसभा में पूछा था की जम्मू-कश्मीर में ज़मीन की खरीद बिक्री की स्थिति क्या है? क्या केंद्रशासित प्रदेश के बाहर के किसी व्यक्ति ने अब तक जम्मू-कश्मीर में ज़मीन खरीदी है? और यदि खरीदी है तो इसका ब्योरा क्या है? इसके जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि पिछले ढाई साल में जम्मू कश्मीर में सात प्लॉट बाहरी लोगों ने खरीदे हैं। लेकिन ये सातों प्लॉट जम्मू संभाग में खरीदे गए हैं। इनमें से एक भी प्लॉट कश्मीर घाटी में नहीं खरीदे गए हैं।

यह भी पढ़ें: मीडिया के कैनवास से गायब हो रही है खोजी पत्रकारिता: CJI एनवी रमना

बता दें कि अगस्त 2019 को पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था। तब सरकार ने दावा किया था कि इससे घाटी में बाहरी लोग प्लॉट खरीद सकेंगे और आतंकवाद पर भी लगाम लगेगा। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार ढाई साल में कोई परिवर्तन नहीं आया।

इसी सत्र में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पूछा था कि धारा 370 हटने के बाद कितने आतंकी और नागरिक मारे गए हैं, साथ ही अबतक कितने सुरक्षाबलों के जवानों को शहादत देनी पड़ी है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद 366 आतंकी मारे गए हैं। जबकि इस दौरान 96 नागरिकों ने अपनी जान गंवाई जबकि सुरक्षाबलों के 81 जवान शहीद हुए हैं।