न्यायपालिका सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह, राजनीतिक दलों को CJI रमना का संदेश

'राजनीतिक दलों के लगता है कि न्यायपालिका को उनके कार्यों का समर्थन करना चाहिए। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि न्यायपालिका संविधान के प्रति जवाबदेह हैं।'

Updated: Jul 03, 2022, 01:29 PM IST

न्यायपालिका सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह, राजनीतिक दलों को CJI रमना का संदेश
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा ने राजनीतिक दलों को दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि न्यायपालिका सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के लगता है कि न्यायपालिका को उनके कार्यों का समर्थन करना चाहिए। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि न्यायपालिका संविधान के प्रति जवाबदेह हैं। न्यायपालिका एक स्वतंत्र अंग है जिसकी जवाबदेही सिर्फ संविधान के प्रति है।

सीजेआई रमना अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में एसोसिएशन ऑफ इंडो-अमेरिकन की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि, 'चूंकि हम इस साल आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। देश के गणतंत्र हुए 72 साल हो गये हैं, ऐसे में कुछ अफसोस के साथ मैं यहां कहना चाहूंगा कि हमने संविधान द्वारा प्रत्येक संस्था को प्रदत्त भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को अब तक नहीं समझा है।'

सरकार के हर कार्य को न्यायिक मंजूरी नहीं: सीजेआई

उन्होंने आगे कहा कि, 'सत्ता में मौजूद पार्टी यह मानती है कि सरकार का हर कार्य न्यायिक मंजूरी का हकदार है। वहीं, विपक्षी दलों को उम्मीद होती है कि न्यायपालिका उनके राजनीतिक रुख और उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी।' सीजेआई रमना ने कहा कि यह त्रुटिपूर्ण सोच संविधान के बारे में और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज के बारे में लोगों की उपयुक्त समझ के अभाव के चलते बनी है।

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सीजेआई ने कहा कि, 'आम लोगों के बीच इस अज्ञानता को जोर-शोर से बढ़ावा दिये जाने से इन ताकतों को बल मिलता है, जिनका लक्ष्य एकमात्र स्वतंत्र संस्था, जो न्यायपालिका है, की आलोचना करना है। मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए कि हम संविधान और सिर्फ संविधान के प्रति उत्तरदायी हैं। संविधान में प्रदत्त नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था को लागू करने के लिए हमें भारत में संवैधानिक संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। हमें व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिकाओं के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। लोकतंत्र भागीदारी करने की चीज है।'

नफरत से मुक्त समाज होना चाहिए: CJI 

रमणा ने प्रवासी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लोग भले ही करोड़पति-अरबपति बन गए हों लेकिन धन का सुख पाने के लिए उन्हें भी अपने आसपास शांति चाहिए होगी। उन्होंने कहा कि आपके माता-पिता के लिए भी घर पर (स्वदेश में) नफरत और हिंसा से मुक्त एक शांतिपूर्ण समाज होना चाहिए। अगर आप स्वदेश में अपने परिवार और समाज की भलाई का ध्यान नहीं रख सकते हैं तो आपकी दौलत और स्टेटस का क्या फायदा? आपको अपने तरीके से अपने समाज में बेहतर योगदान करना होगा।