चुनाव आयोग पर शायद दर्ज होना चाहिए हत्या का मुकदमा, मद्रास हाई कोर्ट की फटकार

मद्रास हाई कोर्ट ने अपनी तल्ख़ टिप्पणी में कहा है कि क्यों ना सेंट्रल इलेक्शन कमीशन के अफ़सरों पर हत्या का मुक़दमा चलाया जाए... क्योंकि वे चुनाव प्रचार के दौरान कोविड से बचाव के नियमों का पालन कराने में नाकाम रहे हैं.. साथ ही यह भी कहा है कि आयोग मतगणना के दिन नियमों को सख्ती से लागू करवाए वरना काउंटिंग स्थगित कर दे

Updated: Apr 26, 2021, 04:32 PM IST

चुनाव आयोग पर शायद दर्ज होना चाहिए हत्या का मुकदमा, मद्रास हाई कोर्ट की फटकार
Photo Courtesy: Zee News

नई दिल्ली/चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने देश में कोरोना के दूसरे सुनामी से परेशान लोगों के ग़ुस्से को अभिव्यक्त किया है। कोर्ट ने कोरोना के इस विस्फोटक रूप के लिए निश्चित ही चुनाव आयोग को ज़िम्मेदार ठहराया है। मद्रास हाई कोर्ट ने चुनावी रैलियों को न रोक पाने वाले चुनाव आयोग के अधिकारियों पर सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्यों ना अक्षम अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। 

मद्रास हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश संजीब बैनर्जी और जस्टिस एस रामामूर्ति ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि चुनाव आयोग ही भारत में फैले कोरोना के इस विस्फोटक रूप का जिम्मेदार है। चीफ जस्टिस बैनर्जी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ इसके लिए हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए तो यह कहीं से भी गलत नहीं होगा। 

यह भी पढ़ें : बंगाल में हर चौथा व्यक्ति कोरोना से संक्रमित, कोलकाता में पॉज़िटिविटी रेट 50 फीसदी के पार

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी पर चुनाव आयोग ने कहा कि हमने मतदान के दिन कोरोना संबंधी तमाम दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया था। इस पर कोर्ट चुनाव आयोग पर और बिफर गया। कोर्ट ने कहा कि जब कोरोना के तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक के बाद एक चुनावी रैलियां हो रही थीं तब क्या चुनाव आयोग दूसरे ग्रह पर गया हुआ था? 

कोर्ट ने चुनाव आयोग को 2 मई को होने वाली मतगणना रोक लेने की चेतावनी भी दी है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा है कि अगर मतगणना के दिन कोरोना के दिशानिर्देशों का कड़ाई के साथ पालन नहीं किया गया तो कोर्ट मतगणना को रोकने से भी परहेज़ नहीं करेगा। मद्रास हाई कोर्ट ने मतगणना से पहले उसका एक खाका तैयार कर हाई कोर्ट के समक्ष पेश करने के लिए कहा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को ब्लू प्रिंट तैयार करने के लिए 30 अप्रैल तक की मोहलत दी है। 

यह भी पढ़ें : कोरोना की लड़ाई में मोदी सरकार से 100 कदम आगे हैं राहुल गांधी, अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

मार्च महीने के अंत में और अप्रैल में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुच्चेरी में विधानसभा चुनाव हुए। इस दौरान जोर-शोर पर चुनावी रैलियां की गईं। रैलियों में कोरोना को लेकर बरते जाने वाले तमाम ज़रूरी दिशानिर्देशों की अनदेखी की गई। पश्चिम बंगाल में तो चुनाव आयोग ने आठ चरणों में मतदान कराने का कार्यक्रम तक जारी कर दिया। 

अप्रैल महीने की शुरुआत में जैसे ही कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ने शुरू हुए वैसे ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी तमाम रैलियां स्थगित कर दीं। ममता बैनर्जी ने भी चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल में बचे 4 चरणों के चुनाव एक साथ कराए जाने की मांग की। लेकिन चुनाव आयोग ने ममता की इस मांग को भी ठुकरा दिया। 

यह भी पढ़ें : राहुल गांधी ने रद्द की बंगाल की आगामी रैलियां, कोविड के बढ़ते मामलों के मद्देनजर लिया फैसला

दरअसल चुनाव के कार्यक्रम घोषित होते ही पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। क्योंकि 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव एक दिन में ही संपन्न कराने का कार्यक्रम चुनाव आयोग ने तय किया। वहीं पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर चुनाव आयोग ने आठ चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया था। 

टीएमसी लगातार चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगा रही थी। टीएमसी का कहना था कि चुनाव आयोग ने पहले चार चरणों में उन जगहों पर चुनाव कराए, जिन सीटों पर लोकसभा चुनावों में बीजेपी आगे थी। टीएमसी का कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि बीजेपी को अपने पक्ष में माहौल बनाने का पर्याप्त समय मिल सके। इसके बाद जब बाकी बचे चार चरणों में उन जगहों पर चुनाव के कार्यक्रम तय किए गए जहां लोकसभा चुनावों में टीएमसी का दबदबा रहा था।