आज ही के दिन गुरु ग्रेग के इशारे पर फेंकी गई थी क्रिकेट इतिहास की सबसे काली गेंद

न्यूज़ीलैंड को मैच टाई कराने के लिए आखिरी गेंद पर 6 रन बनाने थे, ग्रेग चैपल ने अपने भाई ट्रेवर चैपल को अंडर आर्म गेंद फेंकने के लिए कहा था, कीवी प्रधानमंत्री ने इसे बताया था क्रिकेट इतिहास की सबसे घिनौनी हरकत

Updated: Feb 01, 2021, 08:38 AM IST

आज ही के दिन गुरु ग्रेग के इशारे पर फेंकी गई थी क्रिकेट इतिहास की सबसे काली गेंद
Photo Courtesy: Times Of India

नई दिल्ली। आज ही के दिन व्हाइट बॉल क्रिकेट के इतिहास में सबसे काली गेंद फेंकी गई थी। खेल भावना के विपरीत न्यूजीलैंड को मैच टाई कराने से रोकने के लिए ऑस्ट्रेलियन गेंदबाज़ ने आखिरी गेंद पर अंडरआर्म डाली थी। बॉलर ने ऐसा तत्कालीन ऑस्ट्रेलियन कप्तान ग्रेग चैपल के इशारे पर किया था। इस घटना को आज 40 साल पूरे हो गए हैं। 

1 फरवरी 1981 का दिन क्रिकेट इतिहास के काले पन्ने के तौर पर याद किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच बेंसन एंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज कप के बेस्ट ऑफ़ फाइव का तीसरा फाइनल मेलबॉर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जा रहा था। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड 1-1 की बराबरी पर थे। तीसरे मुकाबले की दूसरी पारी में न्यूजीलैंड को मैच जीतने के लिए 236 रन बनाने थे। 

आखिरी ओवर में लक्ष्य हासिल करने के लिए 15 रनों की दरकार थी। कप्तान ग्रेग चैपल ने आखिरी ओवर अपने छोटे भाई ट्रेवर चैपल को थमाया। अंतिम ओवर की पांचवीं गेंद पर ट्रेवर ने इयान स्मिथ को 4 रन के निजी स्कोर पर बोल्ड कर दिया। अब आखिरी गेंद पर कीवी टीम को जीतने के लिए 7 रन बनाने थे। क्रीज पर पुछल्ले बल्लेबाज़ ब्रायन मैकनी आए। ऑस्ट्रेलिया की जीत लगभग तय थी। अगर न्यूजीलैंड को मैच हारने से बचना भी था तो इसके लिए कीवी टीम को अंतिम गेंद पर एक सिक्सर की दरकार थी। 

लेकिन आखिरी गेंद पर कुछ ऐसा हुआ जिसने खेल भावना को शर्मसार कर दिया। ग्रेग चैपल ने ट्रेवर को अंडरआर्म गेंद फेंकने के लिए कहा। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने ऑन फील्ड अंपायर को यह सूचित किया कि अगली गेंद अंडरआर्म होगी। अंतिम गेंद का सामना करने वाले बल्लेबाज़ ब्रायन मैकनी को खुद ग्रेग चैपल ने जा कर बताया कि अगली गेंद अंडरआर्म फेंकी जाएगी। मैकनी स्तब्ध रह गए। 

खेल भावना को तार तार करने की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। ट्रेवर चैपल अंडरआर्म फेंकने के लिए खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर रहे थे। लेकिन इन सबके बीच विकेट के पीछे खड़े ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर रोड मार्श ट्रेवर को ऐसा करने से मना कर रहे थे। ट्रेवर मार्श को बता रहे थे कि यह उनका नहीं बल्कि ग्रेग चैपल का फैसला है, लिहाज़ा ट्रेवर कुछ नहीं कर सकते। उनके हाथ में कुछ नहीं है। ट्रेवर गेंद करने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने तय योजना के अनुसार अंडरआर्म गेंद ही फेंकी। बल्लेबाज़ ब्रायन मैकनी उस गेंद पर कुछ नहीं कर पाए और न्यूजीलैंड यह मैच 6 रनों से हार गया। 

उस समय तक अंडरआर्म गेंद के बारे में कोई स्पष्ट नियम नहीं था। इस लिहाज़ से यह गेंद जायज़ तो ज़रूर थी लेकिन खेल भावना के बिल्कुल विपरीत थी। इस एक गेंद ने उस मैच को क्रिकेट के इतिहास में हमेशा के लिए बदनाम कर दिया। यह गेंद फेंके जाने के दौरान कमेंट्री बॉक्स में चैपल बंधुओं के बड़े भाई इयान चैपल खुद मौजूद थे। इयान चैपल ने कहा, नहीं ग्रेग तुम ऐसा नहीं कर सकते। 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम, खास तौर पर ग्रेग चैपल की काफी आलोचना हुई। बात कितनी बड़ी थी इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस घटना की निन्दा की थी। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री रोबर्ट मल्डून ने तो इसे क्रिकेट इतिहास की सबसे घिनौनी घटना तक बता दिया। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम फ्रेजर ने भी ग्रेग की इस योजना को खेल भावना के विपरीत माना था। 

इस घटना पर एक डॉक्यूमेन्टरी भी बनी है। मैच का हिस्सा रहे ज़्यादातर क्रिकेटरों ने उस गेंद और उसके बाद की प्रतिक्रिया के बारे में विस्तार से बताया है। ग्रेग चैपल बताते हैं कि मैच समाप्त होने के थोड़ी ही देर बाद एक छोटी बच्ची ने उनका शर्ट पकड़ लिया और कहा कि तुमने धोखा दिया। गेंद डालने वाले ग्रेग के छोटे भाई ट्रेवर बताते हैं कि होटल रूम में ग्रेग से बात करने के लिए फोन कॉल आ रहे थे। ट्रेवर को अंडरआर्म गेंद फेंकने से मना करने वाले विकेटकीपर रोड मार्श ने कीवी टीम के खेमे में जाकर माफी मांगी थी।  

हालांकि खेल भावना को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं का यह इकलौता उदाहरण नहीं है। कुछ ऐसा ही 2010 में भारत, श्रीलंका और न्यूजीलैंड की त्रिकोणीय श्रृंखला के दौरान हुआ था। 16 अगस्त को दाम्बुला के मैदान में 99 रन के निजी स्कोर पर बैटिंग कर रहे वीरेंद्र सहवाग को शतक बनाने से रोकने के लिए श्रीलंकाई गेंदबाज सूरज रणदिवे ने नो बॉल फेंक दी थी।