विख्यात लेखिका मन्नू भंडारी का निधन, आपका बंटी और आंखों देखा झूठ जैसी कहानियों से मिली थी प्रसिद्धि

हिन्दी साहित्य में अपनी छाप छोड़नेवाली मन्नू भंडारी ने 90 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया.., महाभोज, एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई जैसी कालजयी रचनाओं से उन्होंने पाठकों का खूब दिल जीता..उनकी कहानी यही सच है पर बासू चटर्जी ने बनाई थी फिल्म रजनीगंधा

Updated: Nov 16, 2021, 06:39 PM IST

विख्यात लेखिका मन्नू भंडारी का निधन, आपका बंटी और आंखों देखा झूठ जैसी कहानियों से मिली थी प्रसिद्धि
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अपने लेखन से पुरुषवादी समाज पर करारी चोट करने वाली प्रख्यात हिंदी लेखिका मन्नू भंडारी का निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे करीब 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। मंदसौर के भानपुरा में 3 अप्रैल, 1931 को जन्मी मन्नू भंडारी के निधन से हिंदी साहित्य जगत की एक पीढ़ी का अंत हो गया है। मन्नू भंडारी की आरंभिक शिक्षा दीक्षा अजमेर हुई, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य में एम.ए. की डिग्री हासिल की।

मन्नू भंडारी की गिनती आजादी के बाद के भारत की आकांक्षी महिलाओं की कहानियों को लिखने वाली लेखिका के तौर पर होती है। इनकी रचनाओं में महिला किरदारों के संघर्ष और समाज में उनकी स्थिति का चित्रण विस्तार से किया जाता था। जाने माने फिल्मकार बासू चटर्जी ने मन्नू भंडारी की कहानी यही सच है पर फिल्म रजनीगंधा का निर्माण किया था, विद्या सिन्हा और अमोल पालेकर स्टारर फिल्म को फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया था। मन्नू भंडारी की कहानियों में महिलाएं पुरानी रुढ़ियों को तोड़ते, स्वतंत्र अस्तित्व की बात करते नजर आती हैं। वे दिल्ली के फेमस मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापिका के तौर पर काम कर चुकी हैं। उनका विवाह जानेमाने साहित्यकार और हंस पत्रिका के संपादक राजेंद्र यादव से हुआ था।

  वे 1952-1961 तक कोलकाता बालीगंज शिक्षण सदन में हिंदी की शिक्षिका थीं। 1961-1965 तक कोलकाता रानी बिरला कॉलेज में, 1964-1991 तक मिरांडा हाउस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी, फिर 1992-1994 तक वे विक्रम यूनिवर्सिटी की उज्जैन प्रेमचंद सृजनपीठ में डायरेक्टर के तौर पर कार्य किया।

 

मन्नू भंडारी नई कहानी आंदोलन का हिस्सा रही हैं, इस आंदोलन की शुरुआत निर्मला वर्मा, राजेंद्र यादव, भीष्म साहनी, कमलेश्वर जैसे लेखकों द्वारा की गई थी। उनकी चर्चित कहानियों में, एक प्लेट सैलाब, मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है ,त्रिशंकु, आंखों देखा झूठ और अकेली जैसी कई रचनाएं शामिल हैं। उन्होंने 1966 में बिना दीवारों का घर  नाटक भी लिखा था।

मन्नू भंडारी को उनकी रचनाओं के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिसमें हिन्दी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, बिहार सरकार, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, व्यास सम्मान और उत्तर-प्रदेश हिंदी संस्थान सम्मान शामिल हैं।

उन्होंने अपना पहला नॉवेल अपने पति के साथ मिलकर लिखा था, उनका उपन्यास 'एक इंच मुस्कान' 1961 में प्रकाशित हुआ था। यह एक प्रेम त्रिकोण की कहानी थी जिसमें एक ही पुरुष से दो महिलाओं को प्रेम हो जाता है, इसमें दोनों महिलाओं के संवाद मन्नू ने लिखे थे, जबकि पुरुष संवाद उनके पति राजेंद्र यादव ने लिखे थे। इस उपन्यास को लोगों ने काफी सराहा था। वहीं मन्नू भंडारी के उपन्यास आपका बंटी भी अपने दौर में काफी चर्चा में रहा था। इस नॉवेल के माध्य से एक ऐसे बच्चे की कहानी पेश की गई थी, जिसके माता-पिता तलाक के बाद अलग-अलग लोगों से शादी कर लेते हैं। इस उपन्यास में शादी के टूटने के बाद बच्चे पर होने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को दिखाया गया था। इस उपन्यास को हिंदी साहित्य में नई तरह की कहानी की वजह से पसंद किया गया था। इस नॉवेल को फ्रेंच, बंगाली और इंग्लिश में भी अनुवाद किया गया था।