सिंधिया बीजेपी में पढ़ेंगे राजनीति का पहला पाठ, सावरकर मंडल का सदस्य बनाए जाने पर कांग्रेस का तंज

बीजेपी ने पांच मंडलों की कार्यकारिणी घोषित की, ज्योतिरादित्य सिंधिया सावरकर मंडल में आमंत्रित सदस्य बनाए गए, जबकि उनके समर्थकों को जगह नहीं मिली

Updated: Dec 22, 2020, 11:09 PM IST

सिंधिया बीजेपी में पढ़ेंगे राजनीति का पहला पाठ, सावरकर मंडल का सदस्य बनाए जाने पर कांग्रेस का तंज
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भोपाल। प्रदेश में बीजेपी को सत्ता की चाभी थमाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद बीजेपी में जा कर सियासत का आरंभिक पाठ पढ़ रहे हैं, कांग्रेस ने यह बात बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तंज़ करते हुए कही है। एक हिंदी न्यूज़ चैनल के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया को सावरकर मंडल का आमंत्रित सदस्य बनाए जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि कभी कांग्रेस की अपेक्स बॉडी में शामिल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया आज बीजेपी में राजनीति का शुरुआती पाठ पढ़ने को मजबूर हैं।

सिंधिया को बीजेपी की राजनीति समझने में समय लगेगा 
कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस में वे पार्टी के शीर्ष नेताओं में शामिल हुआ करते थे। लेकिन बीजेपी में जाने होने के बाद सिंधिया की यह हालत हो गई है कि बीजेपी उन्हें शुरुआती पाठ पढ़ा रही है। उसके बाद वे विद्यालय, महाविद्यालय की पढ़ाई करेंगे, तब जाकर सिंधिया बीजेपी की राजनीति को समझेंगे।

बीजेपी नेता आशीष अग्रवाल ने कांग्रेस नेता के इस तंज पर सफाई देते हुए कहा है कि बीजेपी में वरिष्ठ नेताओं को भी मंडल और ज़िले की बॉडी में रखा जाता है। बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वंशवाद की कोहनी पर टिके लोग इसे समझ नहीं पाएंगे।

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दरअसल बीजेपी ने अपने 5 मंडलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी है। चार मंडलों में सहमति नहीं बनने से कार्यकारिणी की घोषणा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौर मंडल, रानी लक्ष्मीबाई मंडल, कोटेश्वर मंडल, वीर सावरकर मंडल और पंडित दीनदयाल उपाध्याय मंडल की कार्यकारिणी की घोषणा पार्टी ने की है। जिसमें बीजेपी ने 1 अध्यक्ष, 6 उपाध्यक्ष और 2 महामंत्री समेत करीब 80 कार्यकर्ताओं को मंडल स्तर की जिम्मेदारी सौंपी है। यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि बीजेपी ने अपने इन मंडलों में सिंधिया समर्थक नेताओं को शामिल नहीं किया है।

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एक तरफ जहां सिंधिया और उनके समर्थक शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार की राहें देख रहे हैं। तो बीजेपी निगम मंडल में सिंधिया को आमंत्रित सदस्य बना रही है। इस समय सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि समर्थक ज्योतिरादित्य सिंधिया पर लगातार मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दबाव बना रहे हैं। खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया हाल ही में शिवराज सिंह चौहान से मुलाक़ात भी कर चुके हैं। लेकिन शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर आनाकानी भरा रवैया अपना रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी की आंतरिक बैठकों में कह चुके हैं कि सिंधिया खेमें में मंत्रिपद की लालसा इतनी हावी है कि पार्टी में गुटबाज़ी को बढ़ावा मिल रहा है। बीजेपी के कई ऐसे नेता हैं जो आठ महीने से इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी मंत्रिपद हासिल करने की जल्दबाज़ी नहीं दिखाई।  

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बीच में यह चर्चा भी चली थी कि शिवराज पर मंत्रिमंडल विस्तार का दबाव बनाने के लिए सिंधिया के मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन जैसे ही प्रदेश की सियासत में कैश कांड की हवा चली, सिंधिया समर्थकों की मंत्री पद की उम्मीद एक बार फिर कमज़ोर पड़ गई। कांग्रेस ने तो यहां तक दावा किया है कि कैश कांड को प्रदेश की सियासत में बीजेपी की ओर से इसलिए उजागर किया गया है ताकि सिंधिया समर्थकों पर दबाव जारी रखा जा सके।