भोपाल में अगले हफ्ते से होगा कोरोना वैक्सीन के तीसरे दौर का ट्रायल

Corona Vaccine Trial: भोपाल में कोरोना की कोवैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल अगले हफ्ते से शुरू हो जाएगा, दो से तीन हज़ार लोगों को दिए जाएंगे डोज़

Updated: Nov 21, 2020, 09:47 AM IST

भोपाल में अगले हफ्ते से होगा कोरोना वैक्सीन के तीसरे दौर का ट्रायल
Photo Courtesy : News 18

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगले हफ्ते से कोवैक्सीन नाम से बनाए जा रहे कोरोना के टीके का ट्रायल शुरू हो जाएगा। तीसरे चरण के इस ट्रायल के तहत भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल और एक निजी अस्पताल में 2 से 3 हजार लोगों को कोवैक्सीन के डोज़ दिए जाएंगे। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया ने भोपाल के इन दो अस्पतालों समेत देश के कुल 23 संस्थानों में कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की मंजूरी दे दी है।

तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान हर वालेंटियर को कोवैक्सीन के दो डोज़ लगाए जाएंगे। एक डोज 0.5 एमएल का होगा। ट्रायल में शामिल लोगों को कोवैक्सीन का पहला डोज दिए जाने के 28वें दिन दूसरा डोज दिया जाएगा। ट्रायल में शामिल वालेंटियर की सेहत की जांच टीका लगाए जाने के बाद अगले तीन महीने तक हर हफ्ते की जाएगी। टीका लगाने से पहले हर वाॅलेंटियर का आरटीपीसीआर तकनीक से कोविड टेस्ट और एंटी बॉडी टेस्ट भी कराया जाएगा। क्लीनिकल ट्रायल में 18 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को शामिल नहीं किया जाएगा।

क्लीनिकल ट्रायल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार कोवैक्सीन 18 साल से 99 साल तक के स्वस्थ महिला अथवा पुरुष को उसकी सहमति लेकर लगाई जाएगी। इससे पहले क्लीनिकल ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देने वाले महिला, पुरुष की मेडिकल जांच की जाएगी।

देश भर में इस वैक्सीन का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल 23 संस्थानों में 28500 लोगों पर होगा। भारत बायोटैक इंटरनेशनल लिमिटेड और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तरफ से बनाई जा रही कोवैक्सीन का पहले और दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो चुका है। यह ट्रायल 1100 लोगों पर हुआ था। अच्छी बात यह है कि शुरूआती दोनों फेज के ट्रायल में कोवैक्सीन के खराब साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं।

क्लीनिकल ट्रायल स्टडी में 30 प्रतिशत ऐसे वाॅलेंटियर को वैक्सीन लगाई जाएगी, जो बीपी, डायबिटीज से पीड़ित हैं, लेकिन दवा से उनकी बीमारी काबू में हैं। ट्रायल में इस श्रेणी के 30 प्रतिशत वाॅलेंटियर रखने की वजह कोविड मरीजों में बड़ी संख्या में कोमोर्बेडिटी का मिलना है।

टीकाकरण के बाद वाॅलेंटियर की इम्युनोजैनिसिटी जांच की जाएगी। इस जांच में टीकाकरण के बाद संबंधित व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में हुए बदलावों का एनालिसिस किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक वाॅलेंटियर का टीकाकरण के बाद एंटी बॉडी टेस्ट एक निश्चित समयांतराल के बाद किया जाएगा। ताकि संबंधित में वैक्सीनेशन के बाद एंटी बॉडी बनने के लेवल को जांचा जा सके।

क्लीनिकल ट्रायल प्रोजेक्ट में शामिल एक संस्थान के इन्वेस्टिगेटर ने बताया कि ट्रायल में शामिल कोई भी महिला कोवैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद अगले तीन महीने तक गर्भधारण नहीं करेगी। इसकी लिखित सहमति संबंधित महिला को ट्रायल प्रोजेक्ट के अनुबंध-पत्र में देनी होगी। इसी तरह इन्वेस्टिगेटर के अनुसार वैक्सीन का पहले डोज के बाद अगर कोई महिला वाॅलेंटियर प्रेग्नेंट होगी तो उसे वैक्सीन का दूसरा डोज नहीं लगाया जााएगा। लेकिन, महिला की सेहत में होने वाले सभी बदलावों की निगरानी की जाएगी।

कोवैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल कहां-कहां होगा
भोपाल के अलावा कोवैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल देश के कई और शहरों में भी होगा। ये शहर हैं: अहमदाबाद (गुजरात), कांचीपुरम, चेन्नई (तमिलनाडु), जाजपुर (ओडिशा), कामरूप (असम), मुंबई, नागपुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना), एम्स (दिल्ली) , फरीदाबाद, रोहतक (हरियाणा), पटना (बिहार), पुडुचेरी, बेंगलुरू (कर्नाटक), विशाखापट्‌टनम, गुंटूर (आंध्र प्रदेश), गोवा, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) और कोलकाता (बंगाल) ।