ग्वालियर में बेशर्म के फूलों से हुआ सिंधिया का स्वागत, NSUI बोली- महाराज से बड़ा बेशर्म कोई नहीं

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने रोका सिंधिया का काफिला, हाथ में थमाया धिक्कार पत्र, पूछा- जब लोग मर रहे थे तब आप कहां थे, पत्र पढ़कर लाल-पीले हुए महाराज

Updated: Jun 12, 2021, 04:44 PM IST

ग्वालियर में बेशर्म के फूलों से हुआ सिंधिया का स्वागत, NSUI बोली- महाराज से बड़ा बेशर्म कोई नहीं

ग्वालियर। बीजेपी नेता व राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपने गढ़ ग्वालियर में बड़ा विरोध का सामना करना पड़ा है। यहां सिंधिया का बेशर्म के फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया गया। इतना ही नहीं उन्हें एक धिक्कार पत्र भी सौंपा गया। बेशर्म के फूल और धिक्कार पत्र पाकर सिंधिया गुस्से से लाल हो गए। बेशर्म का फूल देने वाले एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि दुनिया में महाराज से बड़ा बेशर्म कोई नहीं है, इसलिए बेशर्म के फूलों से हमने उनका स्वागत किया।

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने तीन-दिवसीय ग्वालियर प्रवास पर आए हुए थे। यहां विरोध से बचते हुए उन्होंने तीन दिन गुजार तो लिया लेकिन विदाई के वक़्त ऐसा होगा उन्होंने सोचा भी नहीं था। दिल्ली जाने से पहले सिंधिया का काफिला जब ग्वालियर के गोला मंदिर चौराहे से गुजर रही थी, तभी अचानक दो दर्जन एनएसयूआई कार्यकर्ता सामने आ गए। सिंधिया को लगा कि शायद समर्थक मिलना चाहते हैं और उन्होंने खुशी-खुशी गाड़ी रुकवा दी।

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NSUI कार्यकर्ताओं को माला निकालते देख सिंधिया ने अपने लग्जरी एसयूवी का शीशा नीचे कर सर आगे झुका दिया। इस दौरान एनएसयूआई नेता सचिन द्विवेदी ने उनके गले में बेशर्म के फूलों की माला पहनाई। द्विवेदी ने इस दौरान सिंधिया से कहा कि महाराज आप बड़े ही बेशर्म हो। इसी दौरान एनएसयूआई ने सिंधिया को एक धिक्कार पत्र भी दिया। इस धिक्कार पत्र को पढ़ते ही सिंधिया गुस्से से लाल हो गए और कार का शीशा चढ़ाकर आगे बढ़ गए। 

दरअसल, इस धिक्कार पत्र में लिखा हुआ था कि, 'जब ग्वालियर के लोग कोरोना से मर रहे थे तब आप कहां थे? तब एक भी दिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में दिखाई नहीं दिए लेकिन आज जब कॉरोना का कहर खत्म हो गया तब आप क्या लोगों की मौत का मजाक बनाने और उनके जख्म कुरेदने आए हैं। क्या आपको ये बेशर्मी नहीं लगती?' 

कोरोना काल में गायब रहे सिंधिया का ग्वालियर में काफी समय से विरोध हो रहा था। शहर के कई चौक-चौराहों पर उनकी गुमशुदगी के पोस्टर्स लगे थे। पोस्टर्स में जगजीत सिंह द्वारा गाई मशहूर गजल "चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वह कौन सा देश, जहां तुम चले गए" लिखा हुआ है। ऐसे में सिंधिया को ग्वालियर आने के पहले इस बात का आभास था कि उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ा सकता है। इसीलिए इस बार पूरे तीन दिन वे अतिरिक्त सुरक्षा घेरे के बीच रहे। 

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सिंधिया की सुरक्षा व्यवस्था काफी चौकस थी। पुलिस किसी भी अनजान व्यक्ति को उनके पास जाने तक नहीं दे रही थी। इतना ही नहीं पुलिस ने संभावित विरोध को देखते एनएसयूआई कार्यकर्ता वंश माहेश्वरी को नज़रबंद कर दिया था। साथ ही पुलिस सचिन द्विवेदी को भी ढूंढ रही थी, लेकिन पुलिस की नजरों से बचकर सचिन ने योजनाबद्ध तरीके से सिंधिया को बेशर्म का फूल भेंट किया।