MP के इस अस्पताल में पांचवें फ्लोर तक जाते हैं वाहन, सुविधाओं की कमी ने अस्पताल को बनाया आत्मनिर्भर

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल में मरीजों को बाइक पर बिठाकर वार्ड में ले जाते हैं परिजन, लिफ्ट खराब होने से आई यह नौबत

Updated: Jul 24, 2021, 06:09 PM IST

MP के इस अस्पताल में पांचवें फ्लोर तक जाते हैं वाहन, सुविधाओं की कमी ने अस्पताल को बनाया आत्मनिर्भर

छतरपुर। मध्य प्रदेश अजब है सबसे गजब है। इस कहावत को छतरपुर जिला अस्पताल ने एक बार फिर चरितार्थ कर दिया है। छतरपुर का शासकीय अस्पताल पांच मंजिला है। आपको विश्वास नहीं होगा कि यहां ग्राउंड फ्लोर से पांचवें फ्लोर तक मरीज और उनके परिजन वाहनों से आवाजाही करते हैं। बाइक और ऑटो दोनों अस्पताल के ऊपरी मंजिल तक जाती है। सुनने में तो यह वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी के जैसा प्रतीत हो रहा है लेकिन हकीकत यह है कि सुविधाओं की कमी ने इस अस्पताल को आत्मनिर्भर बना दिया है।

दरअसल, जिला अस्पताल में स्ट्रेचर की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ में एकमात्र लिफ्ट भी खराब हो गई है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को संबंधित वार्ड तक ले जाने के लिए बाइक और ऑटो ही एकमात्र सहारा है। यहां मरीज के परिजन अपने निजी वाहनों से आते हैं और उससे ही जिस फ्लोर पर जाना होता है चले जाते हैं। अस्पताल का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें आप देख सकते हैं कि एक मरीज को बाइक पर बिठाकर परिजन ऊपर ले जा रहे हैं। 

वीडियो में बाइक पर पीछे बैठे व्यक्ति का नाम जितेंद्र चौरसिया है। महाराजपुर निवासी जितेंद्र बताते हैं कि उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और पैदल चलने की स्थिति में नहीं हैं। डॉक्टर ने कई तरह का जांच लिखा था। जांच कराने के लिए हमें तीसरे फ्लोर पर जाना था। उन्हें बाइक से ले जाने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। जितेंद्र ने बताया कि अस्पताल में हर वार्ड के बाहर दोपहिया और तीन पहिया वाहन खड़े रहते हैं।

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स्थानीय लोगों के मुताबिक जब अस्पताल में कोई प्रसूता आती है तो प्रसूतिगृह तक ले जाने के लिए परिजन ऑटो बुलाते हैं। छतरपुर निवासी सदफ खान ने जिला अस्पताल के इस हाल को लेकर तंज कसते हुए कहा कि ये हमारे मामाजी का विकास मॉडल है। उन्होंने कहा, 'अभी तो अस्पताल में बाइक और ऑटो चल रहे हैं। आने वाले समय में अस्पताल के छत पर हेलीकॉप्टर की भी लैंडिंग होगी।'

हमसमवेत ने जब सीएमएचओ छतरपुर डॉ विजय पाथोडीया से इस बारे संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि ये बात आप सिविल सर्जन को बताइए। उधर कई प्रयासों के बावजूद छतरपुर कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने कॉल का जवाब नहीं दिया।