CM शिवराज के गृह जिले में खाद की किल्लत, आक्रोशित किसानों ने सड़कों पर उतरकर किया हंगामा

यूरिया क्राइसिस से जूझ रहा मध्य प्रदेश, सुबह से लाइनों में लगे रहते हैं किसान, शाम तक खाद की जगह मिलती है निराशा

Updated: Dec 05, 2021, 02:13 PM IST

CM शिवराज के गृह जिले में खाद की किल्लत, आक्रोशित किसानों ने सड़कों पर उतरकर किया हंगामा

सिहोर। मध्य प्रदेश खाद की भयंकर किल्लत से जूझ रहा है। स्थिति ये है कि किसान एक–एक बोरी खाद के लिए तरस रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज के गृहजिले सीहोर में खाद के लिए किसानों ने जोरदार हंगामा किया। किसानों का आरोप है कि वे सुबह से सारा काम छोड़कर लाइनों में लग जाते हैं, लेकिन शाम तक उन्हें खाद के जगह निराशा हाथ लगती है।

बुधनी विधानसभा क्षेत्र जहां से विधायक चुनकर शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने हैं, वहां भी स्थिति यही है। बुधनी विधानसभा के रेहटी तहसील में सैकड़ों किसानों ने यूरिया खाद का वितरण नहीं होने के कारण सड़क को जाम कर दिया। बाद में तहसीलदार, थाना प्रभारी ने मौके पर जाकर स्थिति संभाली औैर किसानोें वापस लौटे।

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खास बात है की हंगामे और विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला किसान भी दिखीं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि वे सुबह के 7 बजे से खाद के लाइनों में लग जाती हैं। बावजूद उन्हें खाद नहीं दिया जा रहा है। बता दें कि इस साल किसानों को खाद की समस्या का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। बोवनी के वक़्त किसान डीएपी खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहे। अब बोवनी के बाद उन्हें यूरिया खाद भी समय पर नहीं मिल रही है।

60-70 मेट्रिक टन गेहूं कम होने का अनुमान

कृषि विशेषज्ञ इसे आर्टिफिशियल क्राइसिस बता रहे हैं। किसान नेता केदार सिरोही ने बताया कि सरकार को पता था कि कितना खाद लगेगा। लेकिन उन्होंने जानबूझकर डिमांड के मुकाबले 50 फीसदी सप्लाई को घटा दिया। ताकि कालाबाजारी करने वालों को फायदा पहुंचे। खाद के लिए 15 जनवरी तक किसान इसी तरह भटकते रहेंगे। उन्होंने अनुमान जताया कि इस बार खाद न मिलने के कारण प्रदेशभर में 60 से 70 मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन कम होगा।

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सिरोही ने आरोप लगाया कि सरकार और कॉरपोरेट की मिलीभगत का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सिरोही ने कहा, 'खाद के लिए लाइन में लगे किसानों के ऊपर लाठीचार्ज हो रहा है। विरोध करने पर पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही है। एफआईआर तो मंत्रियों पर होना चाहिए जो इस स्थिति के लिए वास्तविक रूप में जिम्मेदार हैं। सरकार के पापों का घड़ा भर गया है।'

बता दें कि पिछले महीने बोवनी के समय डीएपी खाद न मिलने से परेशान कई किसानों की आत्महत्या की खबरें आ चुकी है। स्थानीय अखबारों में पिछले तीन महीनों से खाद को लेकर हो रही मारामारी की खबरें आ रही है। इसपर कृषि मंत्री कमल पटेल का कहना है की खाद की किल्लत सिर्फ अखबारों में है, खेतों में नहीं।