विकास के नाम पर मजाक, इंदौर-देवास-उज्जैन रेल लाइन के लिए चाहिए 700 करोड़, दिए गए एक हजार रुपए

क्या ऐसे ही होगा प्रदेश का विकास, रेलवे के जिस प्रोजेक्ट के लिए चाहिए 700 करोड़ रुपये, उसके लिए आंवटित हुए सिर्फ एक हजार रुपये

Updated: Feb 09, 2021, 08:51 PM IST

विकास के नाम पर मजाक, इंदौर-देवास-उज्जैन रेल लाइन के लिए चाहिए 700 करोड़, दिए गए एक हजार रुपए
Photo Courtesy: rail info

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से अन्य जिलों को जोड़ने के लिए इंदौर-देवास-उज्जैन रेल लाइन का दोहरीकरण किया जाना है। लेकिन अब यह कार्य असंभव लगने लगा है। रेल मार्ग डबल करने के लिए रेल बजट में केवल एक हजार रुपए स्वीकृत हुए हैं। जिससे देवास के कुछ ठेकेदारों ने काम रोक दिया है। रेलवे का यह प्रोजेक्ट में 700 करोड़ की लागत से तैयार होना है। लेकिन इस साल इस प्रोजेक्ट के लिए एक हजार रुपए मिलना प्रदेश की जनता से छलावा ही माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रेल मंत्रालय के कर्मचारियों की गलती की वजह से बजट में महज एक हजार रुपए अलॉट हुए हैं।

इस मामले में कांग्रेस ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस ने इस बजट को हास्यास्पद कहा है। कांग्रेस का कहना है कि इंदौर सांसद की उदासीनता की वजह से बजट के नाम पर मजाक किया गया है। कांग्रेस प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव ने कहा कि बजट जारी करने से पहले सांसदों से सभी योजनाओं की जानकारी मांगी जाती है। उन्हें लिखित में देना होता है कि उनके संसदीय क्षेत्रों में कौन सी सुविधाओं की जरूरत है। 

वहीं इंदौर सांसद ने इस एक हजार रुपए के जारी होने को अधिकारियों की गलती बताया है। अब इंदौर, देवास और उज्जैन के सांसद केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात कर रेल बजट पर चर्चा कर बजट बढ़ाने की मांग करने की तैयारी में हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार ने इंदौर-देवास-उज्जैन रेल मार्ग के दोहरीकरण करने का ऐलान किया था। जिसके लिए 700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। जिसमें अन्य विभागों का खर्चा भी जोड़ा गया था।

इसमें सिविल कार्य के लिए 430 करोड़, सिग्नल एंड टेलीकॉम पर 101 करोड़, टीआरडी पर 129 करोड़ और इलेक्ट्रिक पॉवर पर 18.5 करोड़ रुपये खर्च आना है। 80 किलो मीटर के इस मार्ग के लिए 3 साल से काम जारी है, लेकिन अब तक केवल 15 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण पूरा हुआ है, अभी 65 किलोमीटर में काम होना है। जाहिर है, पर्याप्त फंड के बिना यह अधूरा काम पूरा नहीं हो सकता है।