Plastic Or Planet: स्वच्छ एम्बेस्डर्स ने लिया प्लास्टिक मुक्त भोपाल का संकल्प, बच्चों के लिए खास बना नो प्लास्टिक डे

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे पर भोपाल के युवाओं का सराहनीय प्रयास, सामुहिक रूप से प्लास्टिक त्यागने का संकल्प, दुकान और ठेले वालों को समझाया

Updated: Jul 03, 2021, 05:19 PM IST

Plastic Or Planet: स्वच्छ एम्बेस्डर्स ने लिया प्लास्टिक मुक्त भोपाल का संकल्प, बच्चों के लिए खास बना नो प्लास्टिक डे

भोपाल। विश्वभर में आज इंटरनेशनल प्लास्टिक फ्री डे मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के युवाओं ने इस मौके पर नो प्लास्टिक इन भोपाल थीम के साथ राजधानी को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। स्वच्छ एम्बेस्डर्स ग्रुप के सदस्यों द्वारा इस मौके पर राजधानी के विभिन्न इलाकों में जागरूकता अभियान चलाए गए।

स्वच्छ एम्बेस्डर्स ग्रुप की सदस्य अंजिता समलोक ने बताया कि नो प्लास्टिक डे के मौके पर हम सबसे पहले आंगनवाड़ी के बच्चों से मिलने पहुंचे। इसके पीछे मकसद यह था कि कम उम्र से ही बच्चों को प्लास्टिक से होने वाले गंभीर नुकसान के बारे में बताया जा सके। यहां उन्हें सिंगल यूज प्लास्टिक पर निर्भरता खत्म करने के लिए जागरूक किया गया। यहां लोग अपने घरों को प्लास्टिक के कचरे लेकर आए थे, जिन्हें इकट्ठा कर निष्पादित किया गया। इस दौरान लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्लास्टिक के कचरे के बदले हमारे साथियों द्वारा मैगी बांटा गया।

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राजधानी के हेल्पिंग हैंड्स ग्रुप की फॉउंडर अवि शुक्ल ने बताया कि अपने हाउसिंग सोसाइटी में उन्होंने एक जागरूकता अभियान रखा है, जिसमें बच्चे-बूढ़े सभी लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने का संकल्प दिलाया जाएगा। इस दौरान लोगों को अपने घरों से इलेक्ट्रॉनिक-कचरा लाने के लिए कहा गया है। ई-कचरे के बदले हम कपड़े से बने थैले बांटेंगे। इससे ई-कचरा का भी निष्पादन हो सकेगा और लोगों को प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कपड़े के थैले भी मिलेंगे। 

इस मौके पर मन्नत वेलफेयर और हैपिनेस क्लब के सदस्यों ने शहर के विभिन्न इलाकों में ठेले वालों से लेकर छोटे दुकानदारों को प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल न करने के लिए जागरूक किया। उन्होंने सभी लोगों को बताया कि यदि वे अपने आने वाले पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित करना चाहते हैं और अपने धरती को बचाना चाहते हैं तो आपको प्लास्टिक और धरती में से एक विकल्प को चुनना होगा। इस दौरान अधिकांश लोगों ने आश्वासन दिया कि वे यथासंभव प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे।

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मध्यप्रदेश में आधिकारिक रूप से सिंगल यूज  प्लास्टिक पर काफी समय से बैन लगा हुआ है। हालांकि, सरकार के इस आदेश को दिन के उजाले में हर जगह मुंह चिढ़ाया जाता है। स्थिति ये है कि प्रदेश में प्लास्टिक का उपयोग चोरी-छिपे नहीं होती, बल्कि विधानसभा और वल्लभ भवन जहां से सभी नियम-कानून बनते हैं, उसी के 100-200 मीटर की दूरी पर प्लास्टिक के थैले में सामान बेचा जाना आम है। 

प्लास्टिक की रोकथाम को लेकर सरकार के उदासीन रवैए पर भी युवाओं ने चिंता जताई है। अवी शुक्ल में हम समवेत से बातचीत के दौरान कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक ओर दिखावे के लिए प्लास्टिक बैन करती है, लेकिन क्या यह संभव है कि सरकार के मर्जी के बगैर राज्यभर में प्लास्टिक का सप्लाई हो? प्लास्टिक प्रोडक्शन कंपनियों को खुश करने के लिए सरकार सख्ती नहीं करती। इसलिए हमलोगों ने अब आम जनता को जागरूक करना शुरू कर दिया है, ताकि सप्लाई पर्याप्त होने का बाद भी लोग प्लास्टिक का बहिष्कार करें। सरकार की इच्छाशक्ति हो न हो हम अपना दायित्व निभाने से पीछे नहीं हट सकते।'