मजदूर भूख से हलकान, यहां सड़ रही धान

लापरवाही पर जिम्‍मेदारों के आरोप-प्रत्‍यारोप

Publish: May-14, 2020, 06:51 PM IST

मजदूर भूख से हलकान, यहां सड़ रही धान

लॉकडाउन है और काम बंद हो चुका है। दो पैसे कमाने की चिंता में अपने घर से कई सौ किलोमीटर दूर गए श्रमिक खाली हाथ अपने गांव लौट रहे हैं। कोई ट्रक में छिप कर, लिफ्ट लेकर जा रहा है तो कोई साइकिल से अपना परिवार लेकर निकल पड़ा है। जिन्‍हें कुछ साधन नहीं मिला वे पैदल ही चल पड़े हैं। रास्‍ते में लोग खाने को दे देते हैं तो पेट भर लेते हैं वरना भूखे पेट गर्मी में चले जा रहे हैं। सरकार ने राशन देने की बात कही है मगर राशन देने में भी भाई भतीजावाद और राजनीति जारी है। बात केवल इतनी ही नहीं है। लोग भूखे हैं और सरकारी तंत्र अपनी लापरवाही से धान को बर्बाद कर रहा है। बारिश में भीगी धान सड़ रही है और जिम्‍मेदार एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है।

Click  संकट का सियासती फायदा

ताजा जानकारी रीवा की है। रीवा के त्योंथर और मांगी खरीदी केंद्र में करीब 42 हजार क्विंटल धान बर्बाद हो रही है। खरीदी केंद्र में खुले में पड़ी धान बेमौसम बारिश की वजह से भीग कर सड़ने लगी है। धान से दुर्गंध भी आने लगी है, जिससे स्थानीय रहवासियों को भी खासा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं इस पूरे मामले में खाद्य विभाग के अधिकारी अपनी गलतियों का ठीकरा सहकारी समितियों पर फोड़ते नजर आए उनका कहना है कि सहकारी समिति की ओर से धान भंडारण के लिए आवेदन नहीं आया। इस मामले में स्थानीय विधायक श्यामलाल द्विवेदी ने खाद्य विभाग की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही है।