पकड़ा गया भोपाल के मैनिट परिसर में घूम रहा टाइगर, बकरी के लालच में पिंजरे में हुआ कैद

मैनिट परिसर में पिंजरे में बंधी बकरी को खाने के लालच में मेल टाइगर पिंजरे में आ फंसा। इसे वन विभाग की टीम सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शिफ्ट कर रही है।

Updated: Oct 16, 2022, 05:36 PM IST

पकड़ा गया भोपाल के मैनिट परिसर में घूम रहा टाइगर, बकरी के लालच में पिंजरे में हुआ कैद

भोपाल। राजधानी भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में पिछले 13 दिनों से घूम रहे बाघ को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित पकड़ लिया है। डीएफओ आलोक पाठक ने बताया कि मैनिट परिसर में पिछले 2 सप्ताह से अधिक समय से एक टाइगर के देखे जाने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद वन विभाग लगातार बाघ की निगरानी कर रहा था।

पाठक के मुताबिक मैनिट परिसर में एक पिंजरा भी लगाया गया था। जिसमें कल रात को यह बाघ कैद हो गया। उन्होंने बताया कि पकड़े गए बाघ को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जाएगा। बता दें कि यह बाघ 2 अक्टूबर को सबसे पहले मैनिट परिसर में छात्रों को दिखाई दिया था। बाघ से हॉस्टल की दूरी महज डेढ़ किलोमीटर थी। बाघ ने इन 13 दिनों में 5 गायों का शिकार भी किया। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने जिसे खदेड़ने की जगह पकड़ने की योजना बनाई और कल रात को वन विभाग की टीम ने दूसरा पिंजरा लगाया। जिसमें उन्होंने बाघ के लिए पिंजरे में एक शिकार भी छोड़ा। जैसे ही बाघ पिंजरे में शिकार करने के लिए आया और पिंजरे में कैद हो गया। 

DFO आलोक पाठक ने बताया कि अब इस बाघ को अब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। मैनिट परिसर में पकड़ाया बाघ पिछले 13 दिनों से वन विभाग के कर्मचारियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। दरअसल वन विभाग पहले इसे रातापानी या वाल्मी की पहाड़ियों में खदेड़ना चाहता था। इसके लिए वन विभाग ने कई ट्रैप कैमरे भी लगाए। लेकिन बाघ हमेशा अपनी लोकेशन बदलता रहा। एक-दो बार ट्रैप कैमरे में कैद भी हुआ। लेकिन बीच बीच में गायब हो गया। 

पिंजरे में फंसे बाघ की उम्र करीब ढाई साल है, लेकिन कद-काठी में वह किसी वयस्क टाइगर की तरह दिखता है। उसका हाइट और वजन अच्छा है। पहले अधिकारियों का अनुमान था कि मैनिट में जो टाइगर घूम रहा है, वह संभवत: बाघिन-123 के दो शावकों में से एक है, जिसे कुछ दिन पहले वाल्मी के पास देखा गया था। हालांकि, टाइगर के पकड़ में आने के बाद पूरी तस्वीर साफ हो गई। ये इलाके में नए बाघ की दस्तक थी।