जगतगुरु के उत्तराधिकारियों का ऐलान, अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ और सदानंद शारदा पीठ के प्रमुख होंगे

द्वारका शारदा पीठ के लिए दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज, वहीं ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के नाम की घोषणा हुई है। उत्तराधिकारियों की घोषणा शंकराचार्य जी की पार्थिव शरीर के सामने की गई।

Updated: Sep 12, 2022, 03:30 PM IST

जगतगुरु के उत्तराधिकारियों का ऐलान, अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ और सदानंद शारदा पीठ के प्रमुख होंगे

नरसिंहपुर। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के देवलोक गमन के बाद उनके उत्तराधिकारियों के नाम का ऐलान हो गया है। उनके शिष्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख घोषित किया गया है। उनके नामों की घोषणा पूज्यपाद शंकराचार्य जी की पार्थिव देह के सामने की गई।

इससे पहले भी ज्योतिष पीठ का प्रभार अविमुक्तेश्वरानंद महाराज जबकि द्वारका पीठ का प्रभार दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती जी ही संभाल रहे थे। वे स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के प्रतिनिधि के रूप में पीठ का कार्यभार संभाल रहे थे। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हिन्दू धर्म के सबसे बडे धर्म गुरु रहे हैं। वे ऐसे एकलौते संत थे जिन्हें दो मठों का शंकराचार्य बनाया गया। स्वरूपानंद सरस्वती जी का सनातन धर्म के लिए सबसे बड़ी क्षति माना जा रहा है।

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जगतगुरु का पार्थिव शरीर झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम के गंगा कुंड स्थल पर रखी गई है। उनके शिष्य आखिरी दर्शन लाभ लेने पहुंच रहे हैं। करीब 4 बजे उन्हें समाधि दी जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर करीब पौने दो बजे उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी। इसके पहले पूर्व सीएम कमलनाथ, विधायक जयवर्धन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी आश्रम जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कमलनाथ ने इस दौरान कहा कि शंकराचार्य जी का जाना सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के परमभक्तों में शुमार कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह उनके अंतिम दर्शन करने केरल से विशेष विमान से जबलपुर पहुंचे हैं। परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर में वह दिवंगत गुरु महाराज के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
माना जाता है कि जब कभी भी दिग्विजय सिंह के सामने कोई संकट उत्पन्न हुई तो उन्होंने महाराजश्री की ही शरण ली। 

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जानकारी के मुताबिक भू समाधि के लिए 108 कलश जल से स्वामी स्वरूपानंद जी को स्नान कराया जाएगा। इस दौरान काशी से आए ब्राह्मण वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार करेंगे। स्नान कराने के बाद उनका दुग्ध अभिषेक किया जाएगा। साथ ही मस्तक पर शालिग्राम जी को स्थापित किया जाएगा। बाद मां भगवती मंदिर से आश्रम तक परिक्रमा होगी। इस परिक्रमा में स्वामी स्वरूपानंद जी को पालकी पर बिठाकर परिक्रमा कराई जाएगी। परिक्रमा पूरी होने के बाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को समाधि स्थल पर ले जाया जाएगा। समाधि स्थल पर कुछ दिनों बाद एक मंदिर बनाया जाएगा और उसमें शिवलिंग की स्थापना की जाएगी।