गाज़ियाबाद में टीकाकरण पर विराम, इंदिरापुरम के अस्पताल ने कहा सोमवार से ही ख़त्म है वैक्सीन

केंद्र सरकार के दावों की खुली पोल, UP में भी वैक्सीन आउट ऑफ स्टॉक, गैर बीजेपी शासित राज्यों में वैक्सीन की किल्लत पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि यह राज्य सरकारों की विफलता

Updated: Apr 08, 2021, 05:57 PM IST

गाज़ियाबाद में टीकाकरण पर विराम, इंदिरापुरम के अस्पताल ने कहा सोमवार से ही ख़त्म है वैक्सीन
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गाजियाबाद। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में वैक्सीन की भारी किल्लत है। लेकिन केंद्र सरकार का दावा है कि देशभर में कहीं भी वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने राज्य सरकारों के दावों को झुठला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वे अपनी नाकामी छिपाने के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं।

इसी बीच अब खबर आई है कि बीजेपी शासित उत्तरप्रदेश में भी कोरोना वैक्सीन आउट ऑफ स्टॉक हो गया है। गाजियाबाद के अस्पतालों ने केंद्र सरकार के तमाम दावों का पोल खोलकर रख दी है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कई अस्पतालों ने टीकाकरण अभियान पर विराम लगा दिया है। अस्पतालों ने गेट के बाहर स्पष्ट रूप से बड़े-बड़े अक्षरों में लिख दिया है कि, 'वैक्सीन आउट ऑफ स्टॉक' यानी अस्पताल में कोरोना वैक्सीन नहीं है। बताया जा रहा है कि गाजियाबाद के कई अस्पतालों में सोमवार से ही वैक्सीन नहीं लगाया जा रहा है। 

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गाजियाबाद के इंदिरापुरम ईलाके के LYF अस्पताल के डायरेक्टर डॉ आलोक गुप्ता ने मीडिया को बताया कि अस्पताल में सोमवार से ही वैक्सीन खत्म है। सोमवार को भी महज 50 लोगों का ही टीकाकरण हो पाया। इससे पहले यहां अमूमन हर दिन 200 लोगों का वैक्सिनेशन किया जा रहा था। उन्होंने कहा, 'हमें इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि वैक्सीन कब तक आ जाएगी। हम लोगों को टीका लगाना तो चाहते ही हैं, लेकिन सरकार की ओर से स्टॉक ही नहीं भेजा जा रहा है। टीका लगवाने जो लोग आ रहे हैं वो वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण हमसे बहस कर रहे हैं।'

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एनडीटीवी ने गाजियाबाद के एक 49 वर्षीय कारोबारी दीपक गुप्ता के हवाले से बताया है कि वे बीते चार दिनों से काम से समय निकालकर वैक्सीन लगाने के लिए अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है क्योंकि अस्पतालों में वैक्सीन नहीं है। यह स्थिति अकेले दीपक की नहीं है बल्कि उत्तरप्रदेश के हजारों लोगों की है। सरकार तो विज्ञापन पर विज्ञापन देकर लोगों से टीका लगवाने की अपील कर रही है कि वे टीका लगवाकर खुद को सुरक्षित कर लें। लेकिन लोग जब अस्पताल जा रहे हैं तो उन्हें कुछ और ही कहानी मालूम पड़ रही है।

ओडिशा में बंद हुए 50% वैक्सीनेशन सेंटर्स

ऐसा ही कुछ हाल ओडीशा और आंध्र प्रदेश का भी है। ओडिशा में वैक्सीन की कमी के कारण 1400 में से 700 वैक्सीनेशन सेंटर्स को बंद करना पड़ा है। स्वास्थ मंत्री ने इस बारे में केंद्र को चिट्ठी लिखकर तत्काल वैक्सीन आपूर्ति कराने की मांग की है। छत्तीसगढ़ सरकार ने तो पहले ही वैक्सीन शॉर्टेज का दावा किया है। इसके अलावा झारखंड और आंध्रप्रदेश की सरकारों ने भी वैक्सीन मुहैया कराने की मांग की है।

महाराष्ट्र के साथ भेदभाव का आरोप

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने तो केंद्र पर महाराष्ट्र के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है। टोपे ने कहा कि उत्तरप्रदेश को 48 लाख, मध्यप्रदेश को 40 लाख, गुजरात को 30 लाख और हरियाणा को 24 लाख कोरोना के डोज दिए गए हैं। जबकि हमें एक हफ्ते के महज साढ़े सात लाख डोज दिए गए हैं। ऐसा तब है जबकि महाराष्ट्र की आबादी 12 करोड़ है। इतना ही नहीं महाराष्ट्र देश में कोरोना से सबसे बुरे तरह से जूझ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि केंद्र सरकार सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों की मदद कर रही है। हालांकि शाम तक केंद्र की तरफ से ये सूचना आयी है कि अब महाराषट्र को 17 लाख वैक्सीन के डोज दिए जाएंगे। 

महाराष्ट्र में कई वैक्सीनेशन केंद्र बंद

इस खबर से पहले महाराष्ट्र के अनेक इलाकों में वैक्सीन की कमी से पैनिक का माहौल है। मुंबई के पनवेल में नगर निगम की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी कर बताया गया है कि वैक्सीन का खुराक खत्म होने की वजह से टीकाकरण अभियान को अस्थाई रूप से रोका जा रहा है। इसी तरह सतारा में भी टीकाकरण रोक दिया गया है। उधर पुणे में टीके की किल्लत की वजह से 109 केंद्रों को बंद कर दिया गया है। हजारों लोगों को बिना टीका लिए वापस लौटना पड़ा क्योंकि स्टॉक खत्म हो गया था। राजधानी मुंबई के कई निजी अस्पतालों में भी टीकाकरण को रोक दिया गया है।

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दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने दावा किया था कि कोरोना वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। और महाराष्ट्र की मांग गैर जिम्मेदाराना, बकवास और बेबुनियाद है। उन्होंने यहां तक आरोप लगा दिया कि महाराष्ट्र सरकार लोगों का ध्यान बांटने और उनमें दहशत फैलाने के लिए इस तरह की बातें कर रही है। साथ ही महाराष्ट्र के इस हाल के लिए उद्धव सरकार पर विफलताओं का ठीकरा भी फोड़ा।