कोविशील्ड वैक्सीन से गुलियन-बेरी सिंड्रोम का खतरा, केरल में मिले 7 मामले

एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी पत्रिका की स्टडी के मुताबिक इस डिसऑर्डर में इम्यून सिस्टम, नर्व सिस्टम में मौजूद हेल्दी टिशूज पर असर पड़ता है

Updated: Jun 25, 2021, 02:30 PM IST

कोविशील्ड वैक्सीन से गुलियन-बेरी सिंड्रोम का खतरा, केरल में मिले 7 मामले
Photo Courtesy: Zeenews

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना के खिलाफ चल रहे टीकाकरण अभियान के बीच एक बुरी खबर सामने आई है। एक स्टडी में पाया गया है कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के कुछ लोगों पर बेहद गंभीर साइडइफेक्ट्स हुए है। इससे गुलियन बेरी सिंड्रोम नामक गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होने का खतरा है। केरल में अबतक इसके सात मामले मिल चुके हैं।

एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि वैक्सीन लेने के बाद जिन लोगों को गुलियन-बेरी सिंड्रोम की शिकायत हुई, उनके चेहरे के दोनों किनारे कमजोर होकर लटक गए थे। आमतौर पर इस सिंड्रोम के 20 फीसदी से भी कम मामलों में ऐसा गंभीर प्रभाव देखने को मिलता है। शोधकर्ता इस बात से भी हैरान हैं कि इतने कम समय में ये बीमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से फैल गयी। 

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स्टडी के मुताबिक भारत में इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के सात मामले सामने आ चुके हैं। इन सभी सात लोगों ने एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड द्वारा विकसित वैक्सीन ली थी। भारत में ये वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से आता है। इन सातों लोगों ने कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज लगवाई थी और उसके 10 से 22 दिन के बीच इनमें गुलियन-बेरी सिंड्रोम के लक्षण देखने को मिले। 

स्टडी के मुताबिक 'गुलियन बेरी' एक दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों के इम्यून सिस्टम, नर्व सिस्टम में मौजूद हेल्दी टिशूज पर असर पड़ता है। खासतौर से इस सिंड्रोम से ग्रसित लोगों के चेहरे की नसें कमजोर हो जाती है। गुलियन बेरी सिंड्रोम के लक्षणों में शरीर में कमजोरी, चेहरे की मांसपेशियां कमजोर होना, हाथ पैर में झनझनाहट और दिल की धड़कन अनियमित रहना शामिल है। रिसर्चर्स का कहना है कि यदि वैक्सीन लेने के बाद सिंड्रोम के कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।