महंगाई से कमाई का उल्टा पड़ा दांव, 14 जिलों में कम हुई पेट्रोल-डीजल की बिक्री

मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में लोग पड़ोसी राज्य से भरवा रहे पेट्रोल-डीजल, मध्य प्रदेश सरकार के खजाने को लगी 1600 करोड़ रुपए की चपत

Updated: Feb 23, 2021, 05:22 PM IST

महंगाई से कमाई का उल्टा पड़ा दांव, 14 जिलों में कम हुई पेट्रोल-डीजल की बिक्री
Photo Courtesy: Magicpin

भोपाल। यह बात तो जग जाहिर है कि देश में पेट्रोल डीजल पर सबसे ज्यादा वैट मध्य प्रदेश में वसूला जाता है। जनता की जेब पर इस वैट का सीधा असर पड़ता है। लेकिन अब सीमावर्ती जिलों के रहवासियों और वहां से गुजरने वाले वाहनों ने मध्य प्रदेश सरकार के भारी-भरकम टैक्स से बचने का तरीका खोज लिया है। अब इन इलाकों में वाहन चालक पड़ोसी राज्यों में जाकर पेट्रोल डीजल भरवा रहे हैं। इसका एक नतीजा यह हो रहा है कि मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री काफी घट गई है, जिससे प्रदेश सरकार को अब तक करीब 1600 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। सीमावर्ती जिलों से केवल 6 से 7 हजार करोड़ रुपए का ही रेवेन्यू ही मिल पा रहा है।

14 जिलों में 30 प्रतिशत कम बिक रहा पेट्रोल-डीजल

मध्य प्रदेश के 14 सीमावर्ती जिलों में फ्यूल की खरीदी में बड़ी मात्रा में कमी आई है। जिससे पेट्रोल-डीजल की बिक्री 30 प्रतिशत तक कम हो गई है। दरअसल रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, दतिया, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, छिंदवाड़ा, बालाघाट में लोगों ने ईंधन भरवाना कम कर दिया है। इन 14 जिलों में लगभग दो हजार पेट्रोल पंप हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश का निवाड़ी जिला मुख्यालय चारों और से उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। निवाड़ी जिले का एक मात्र पेट्रोल पंप कम बिक्री होने की वजह से बंद हो चुका है।

खरीदी कम होने से सरकार को लग रहा है चूना

दरअसल मध्यप्रदेश की अपेक्षा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पेट्रोल-डीजल सस्ता है। ऐसे में इन राज्यों से लगे जिलों के लोग और वहां से गुजरने वाले वाहन उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पार कर पेट्रोल डीजल भरवा लेते हैं। ऐसे में उनकी थोड़ी बचत हो जाती है, वहीं सरकार को जोर का झटका धीरे-धीरे लगता जा रहा है।

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ग्राहकों को एक लीटर पर करीब 10 से 11 रुपए का होता है फायदा

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पेट्रोल भरवाने पर एक लीटर पर करीब 10 से 11 रुपए का फायदा हो जाता है। ऐसे में दूसरे राज्यों से पेट्रोल डीजल भरवाकर वाहन चालक हर महीने काफी बचत कर लेते हैं। मध्यप्रदेश में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तुलना में पेट्रोल 10 से 11 रुपए प्रति लीटर महंगा है। राजस्थान में भी यहां से 2-3 रुपए तक सस्ता है।

मध्य प्रदेश में वसूला जाता है 39 फीसदी वैट

मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 6.2 प्रतिशत और डीजल पर 5.52 प्रतिशत वैट ज्यादा लगता है। उत्तर प्रदेश में 26.8 प्रतिशत वैट है जबकि मध्य प्रदेश में सेस मिलाकर 39 फीसदी वैट वसूला जाता है। वहीं डीजल पर सेस मिलाकर 28 प्रतिशत वैट है, उत्तर प्रदेश में 17.48 फीसदी वैट लगता है।

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समझना जरूरी है कि केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर 1.40 % एक्साइज ड्यूटी, अतिरिक्त विशेष एक्साइज ड्यूटी 11 रुपए, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलेपमेंट सेस 2.50 रुपए और एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के रूप में सड़क व बुनियादी संरचना के लिए 18 रुपए वसूलती है। इस पर भी राज्य सरकारें अपने टैक्स लगा देती है, जिससे इनके रेट और बढ़ जाते हैं।

सरकार को हुआ 1600 से 1700 करोड़ रुपए का घाटा

मध्य प्रदेश में लगभग 42 सौ पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 126 केवल भोपाल में हैं। इनसे सरकार को हर साल 11 हजार करोड़ रुपए की आमदनी होती है। लेकिन अब बिक्री कम होने से सरकार का राजस्व कम हो रहा है। जबतक पड़ोसी राज्यों से सस्ता पेट्रोल डीजल मध्य प्रदेश में नहीं बिकेगा तब तक सरकार को घाटा उठाना पड़ेगा। पड़ोसी राज्यों के पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर कम होने से सरकार की आमदनी में 1600 से 1700 करोड़ रुपए का फायदा हो सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भोपाल में पेट्रोल की खपत साढ़े 9 लाख लीटर औऱ डीजल की 12 लाख लीटर के आसपास है। भोपाल में प्रीमियम पेट्रोल 102 रुपए 26 पैसे और प्रीमियम डीजल  92 रुपए 57 पैसे है। सादा पेट्रोल 98 रुपए 58 पैसे और डीजल 89 रुपए 21 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है।