नोबेल प्राइज विनर को मिली ब्रिटिश मैग्जीन वोग के कवर के पेज पर जगह, खूबसूरत दिखीं मलाला यूसुफजई

मलाला का कहना है कि युवाओं के दिल में वह शक्ति होती है, जब उसके पास एक विजन और एक मिशन होता है, मुझे उम्मीद है कि इस कवर को देखने वाली हर लड़की को पता चलेगा कि वह दुनिया को बदल सकती है।

Updated: Jun 02, 2021, 08:06 PM IST

नोबेल प्राइज विनर को मिली ब्रिटिश मैग्जीन वोग के कवर के पेज पर जगह, खूबसूरत दिखीं मलाला यूसुफजई
Photo courtesy: British Vogue

सबसे कम उम्र की नोबाल प्राइज विनर मलाला यूसुफजई को ब्रिटिश मैग्जीन वोग के कवर पेज पर जगह मिली है। जून 2021 के अंक के कवर पेज पर उन्हें दिखाया गया है। बच्चों के अधिकारों के प्रयास के लिए मलाला को 2021 में शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। वे सबसे कम उम्र में नोबेल सम्मान पाने वाली हस्ती हैं। वहीं यूनाइडेड नेशन ने उन्हें दशक की सबसे फेमस टीन एजर भी कहा था। साल 2020 में मलाला ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। जिसे उन्होंने अपनी बड़ी उपलब्धी बताया था।

मलाला ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "ब्रिटिशवोग के कवर पेज पर आकर रोमांचित और विनम्र हूं! मुझे पता है कि एक युवा लड़की के दिल में वह शक्ति होती है, जब उसके पास एक विजन और एक मिशन होता है, वे लिखती हैं कि मुझे उम्मीद है कि इस कवर को देखने वाली हर लड़की को पता चलेगा कि वह दुनिया को बदल सकती है।”  

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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मलाला ने हर कलर की ड्रेस के साथ हिजाब पहना है, वे रेड लिप कलर और मिनमल एसेसरीज में नजर आई हैं। वोग के लिए मलाला के लुक्स को केट फेलन ने स्टाइल किया है। मैग्जीन में मलाला को कमाल की हस्ती कहा गया है। 23 साल की युवा जो दुनिया में हर जगह सीखने के और महिला के अधिकार के लिए संघर्ष करने को तैयार रहती है।

मलाला यूसुफजई, एक्टिविस्ट हैं, वे लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की समानता की वकालत करती हैं। ब्रिटिश मैग्जीन वोग के एडिटर इन चीफ एडवर्ड एनिनफुल ने सोशल मीडिया पर मलाला के सफेद, लाल और नीले रंग की ड्रेससेज में फोटोज के साथ इंटरव्यू का कुछ भाग शेयर किया है।

एडवर्ड का कहना है कि “जब उन लोगों की बात आती है जिनकी मैं ताऱीफ करता हूं, उनमें मलाला यूसुफजई टॉप पर हैं। 23 साल की उम्र में, दुनिया की सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालय स्नातक पहले ही कई जीवन जी चुकी हैं।

 

कार्यकर्ता, लेखक, लड़कियों की शिक्षा के लिए अथक प्रचारक , बेटी, बहन, छात्र और एक सरवाइवर।  साल 2012 में मलाला पर तालिबानी आतंकी ने हमला कर दिया था। उनके सिर पर गोली मारी गई थी। तालिबानी आतंकी ने स्कूल जाती मलाला की बस में चढ़कर उन्हें गोली मारी थी। फिर ब्रिटेन में लंबे इलाज के बाद मलाला ठीक हुई और दोबारा अपने मिशन में लग गई। मलाला ने 11 साल की उम्र में गुल मकाई नाम से बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखती थी। वे बच्चों की परेशानियों को सामने लाती थीं। वे लड़कियों की शिक्षा और शांति के लिए आवाज उठाने के काम में लगातार जुटी हुई हैं।