मध्य प्रदेश में इस बार विधायकों को मेयर का चुनाव नहीं लड़ाएगी बीजेपी, युवाओं को मौक़ा देने पर रहेगा ज़ोर

ख़बरों के मुताबिक निकाय चुनावों में बीजेपी इस बार 60 साल से ऊपर के उम्मीदवारों को टिकट देने के मूड में नहीं, लंबे अरसे से लगातार पार्षद बनते आ रहे उम्मीदवारों के टिकट भी कट सकते हैं

Updated: Feb 14, 2021, 10:00 AM IST

मध्य प्रदेश में इस बार विधायकों को मेयर का चुनाव नहीं लड़ाएगी बीजेपी, युवाओं को मौक़ा देने पर रहेगा ज़ोर

भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने विधायकों को मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला किया है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कैलाश विजयवर्गीय से शुरू हुई इस परंपरा को अब बीजेपी बदलने जा रही है। कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड़ समेत बहुत से नेता विधायक रहते हुए मेयर का चुनाव लड़कर जीत चुके हैं और दोनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाते रहे हैं। लेकिन खबर है कि बीजेपी इस बार ऐसा नहीं करने जा रही है।

बीजेपी ने इस बार निकाय चुनाव को लेकर कई और अहम फैसले भी किए हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बीजेपी इस मर्तबा 60 की उम्र पार कर चुके उम्मीदवारों को आमतौर पर टिकट नहीं देगी। इसके साथ ही बीजेपी लंबे अरसे से लगातार पार्षद बनते आ उम्मीदवारों को भी टिकट नहीं देने का मन बनाया है। कहा जा रहा है कि पार्टी ने यह फैसला इस चुनाव में युवाओं को ज्यादा मौका देने की कांग्रेस की रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया है। 

हालांकि ऐसा नहीं है कि बीजेपी किसी भी उम्रदराज नेता या लंबे समय से प्रतिनिधि रहे उम्मीदवार को चुनाव नहीं लड़ाएगी। कुछ बेहद खास मामलों में इस पर विचार हो सकता है, लेकिन ऐसा करने के पक्ष में ठोस वजह होनी चाहिए। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक अगर पार्टी को लगता है कि किसी उम्मीदवार की गैरमौजूदगी के कारण आसपास की 5-10 सीटों पर असर पड़ सकता है, तो ऐसी स्थिति में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करके जरूरी फैसला लिया जा सकता है।

कुल मिलाकर संदेश यह है कि इस बार निकाय चुनाव में बीजेपी टिकट वितरण में काफी सावधानी बरतने वाली है। चुनाव को लेकर पार्टी अभी से अलर्ट मोड में आ गई है। पार्टी ने अपने विधायकों और मंत्रियों को अभी से चुनाव की तैयारी में जुट जाने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार निकाय चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, क्योंकि राज्य में इस बार कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है।