जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के VC का इस्तीफा, मंत्री विश्वास सारंग पर लगे दबाव बनाकर इस्तीफा दिलाने के आरोप

फर्जी मार्कशीट घोटाला उजागर होने के बाद से विवादों में है प्रदेश की इकलौती मेडिकल यूनिवर्सिटी, NSUI ने विश्वास सारंग को बताया था मास्टरमाइंड, अब कुलपति का इस्तीफा चर्चा का विषय

Updated: Aug 14, 2021, 07:49 PM IST

जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के VC का इस्तीफा, मंत्री विश्वास सारंग पर लगे दबाव बनाकर इस्तीफा दिलाने के आरोप
Photo Courtesy: raj express

जबलपुर। मध्य प्रदेश के प्रख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ टीएन दुबे ने आखिरकार शनिवार को जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया है। दुबे के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक दबाव मुख्य वजह मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी में फर्जी मार्कशीट घोटाले का भंडाफोड़ होने के बाद से वे परेशान थे और उनपर लगातार अपराधियों को बचाने का दबाव बनाया जा रहा था। मध्य प्रदेश एनएसयूआई ने इसके पहले ही चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग पर शिक्षा माफियाओं से गठजोड़ कर पैसे उगाही का आरोप लगाया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉ टीएन दुबे ने शनिवार को राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल को अपना इस्तीफा भेज दिया। हालांकि, उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस्तीफे की मुख्य वजह चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से नाराजगी और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त (CME) निशांत बरवड़े के दुर्व्यवहार को बताया जा रहा है। यूनिवर्सिटी में बड़े स्तर पर हुए फर्जीवाड़े के बीच कुलपति का इस्तीफा चर्चा का विषय बना हुआ है।

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कुलपति के इस्तीफे को लेकर एनएसयूआई ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग पर गंभीर आरोप लगाया है। NSUI मेडिकल विंग के कोऑर्डिनेटर रवि परमार ने दावा किया है कि मार्कशीट घोटाले के आरोपियों को बचाने के लिए सारंग ने कुलपति पर इस्तीफे का दबाव बनाया। परमार के मुताबिक फर्जी मार्कशीट के खेल में विश्वास सारंग शिक्षा माफियाओं से मिले हुए हैं। परमार ने यह भी दावा किया है कि रसूखदार छात्रों को अवैध तरीके से पास कराकर सारंग ने करोड़ों रुपए की वसूली की है।

दरअसल, कल ही ये खबर आई थी कि जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी में उन मेडिकल स्टूडेंट्स को भी पास कराया गया जिन्होंने कभी परीक्षा ही नहीं दी। फर्जी मार्कशीट मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट इस ओर इशारा करते हैं कि ये व्यापम से भी बड़ा घोटाला साबित हो सकता है। कमेटी ने पाया है कि विश्वविद्यालय में पेपर सेटिंग से लेकर कॉपी जांचने, रीवैल्यूएशन और मार्कशीट जारी करने तक, बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है।

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जांच रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों और माइंड लॉजिक्स कंपनी की मिलीभगत से इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। माइंड लॉजिक्स ही वो कंपनी है जिसे यूनिवर्सिटी ने एग्जाम से संबंधित ठेका दिया था। यह रिपोर्ट अनियमितताओं की जांच कर रही कमेटी द्वारा हाईकोर्ट में पेश किया गया है। हैरानी की बात ये है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोपी कंपनी का जब ठेका निरस्त किया तो कंपनी यूनिवर्सिटी के खिलाफ ही हाईकोर्ट चली गई। 

बताया जा रहा है कि अब कुलपति पर इस बात के लिए दबाव डाला जाने लगा कि कोर्ट में यूनिवर्सिटी कोई ऐसा जवाब या साक्ष्य न दे जिससे ये साबित हो सके कि घोटाले में कंपनी की भूमिका संदिग्ध है। एनएसयूआई कॉर्डिनेटर रवि का दावा है कि कुलपति को सारंग ने स्पष्ट कहा था कि यदि उन्हें रहना है तो हमारे निर्देशानुसार काम करें वरना यूनिवर्सिटी छोड़ दें। रवि ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में विश्वास सारंग की मिलीभगत जांचने के लिए भी कमेटी गठित की जाए। और जब तक जांच पूरी न हो सारंग अपने पद से इस्तीफा दें।'