कश्मीरी पंडितों के पलायन की वजह दिल्ली में बैठी हुकूमत थी, यदि मैं जिम्मेदार तो फांसी पर चढ़ा देना: फारूक अब्दुल्ला

कश्मीरी पंडितों के लिए मेरा दिल आजतक रो रहा है, 1990 में कश्मीर में जो भी हुआ वह साजिश थी, मैं वजीरे आजम से गुजारिश करूंगा कि ऐसी चीजें ना करें जिससे मुसलमान-हिंदुओं के रिश्ते और खराब हों

Updated: Mar 22, 2022, 01:43 PM IST

कश्मीरी पंडितों के पलायन की वजह दिल्ली में बैठी हुकूमत थी, यदि मैं जिम्मेदार तो फांसी पर चढ़ा देना: फारूक अब्दुल्ला
Photo Courtesy: Dawn

श्रीनगर। कश्मीर फाइल्स फिल्म पर चल रहे विवाद के बीच जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने चुप्पी तोड़ी है। फारुक ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पलायन की वजह, तब की दिल्ली में बैठी सरकार थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं इस पलायन के लिए जिम्मेदार पाया जाता हूं तो जहां चाहे वहां फांसी चढ़ा दो।

एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि, 'हर कश्मीरी चाहता है कि कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हो। सन 1990 में जो हुआ वो साजिश थी। कश्मीरी पंडितों को साजिश के तहत भगाया गया। उस वक्त जो दिल्ली में बैठे थे, वो इसके लिए जिम्मेदार हैं। मेरा दिल आज भी उन भाइयों के लिए रो रहा है। कोई कश्मीरी ऐसा नहीं है जो उनके लिए रो नहीं रहा है। सब चाहते हैं कि उनकी कश्मीर वापसी हो। तब ही कश्मीर पूरा होगा।'

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फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि, '90 में जो कुछ हुआ वह साजिश थी, इस साजिश जो किसने किया? इसकी जांच के लिए कमीशन बैठाया जाए, तब पता चलेगा कि कौन-कौन इसमें शामिल था। ए.एस दुल्ल्त (उस वक्त के रॉ प्रमुख), आरिफ मोहम्मद खान, मोहसर रजा (उस वक्त से चीफ सेक्रेटरी) से पूछा जाए कि कश्मीरी पंडितों के जाने के लिए कौन जिम्मेदार है? करीब 800 खानदान (कश्मीरी पंडितों के) अभी भी कश्मीर में शांति से रह रहे हैं। किसी ने उनको हाथ नहीं लगाया, किसी ने उनको नहीं मारा।'

द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अगर मसलों को सुलझाना है तो दिल जोड़ने वाली बात करनी होगी। यह फिल्म दिल जोड़ नहीं रही है बल्कि तोड़ रही है। सारे मुल्क में आग लगा रही है। अगर यह आग नहीं बुझाई गई तो यह सारे देश को एकदम शोले की तरह उड़ा देगी। मैं वजीरे आजम से गुजारिश करूंगा कि ऐसी चीजें ना करें जिससे मुसलमान-हिंदुओं के रिश्ते और खराब हों। ऐसा हुआ तो मुल्क की सूरत ऐसी बन जाएगी जैसी हिटलर के जमाने में जर्मनी में हुई थी।

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फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि कश्मीरी लोगों का दिल जीतने के लिए सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में परिसीमन हो, राज्य का दर्जा वापस दिया जाए। कश्मीर इस देश का ताज है इसको फिर से चमकाया जाए। सरकार को हिंदू मुसलमान का रिश्ता ठीक करने की कोशिश करनी होगी। इसके बाद ठीक से, ईमानदारी से चुनाव कराना होंगे।