गौतम गंभीर फ़ाउंडेशन ने की कोविड-19 दवाइयों की अवैध जमाख़ोरी, ड्रग कंट्रोलर ने कोर्ट से कहा

ड्रग कंट्रोल ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि गौतम गंभीर फाउंडेशन को फैबीफ्लू की जमाखोरी का दोषी पाया गया है, हाई कोर्ट ने दवाओं की जमाखोरी के दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया है, अब अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी

Updated: Jun 03, 2021, 03:26 PM IST

गौतम गंभीर फ़ाउंडेशन ने की कोविड-19 दवाइयों की अवैध जमाख़ोरी, ड्रग कंट्रोलर ने कोर्ट से कहा
Photo Courtesy: The Bridge

नई दिल्ली। बीजेपी सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के फाउंडेशन को कोविड मरीजों को दी जाने वाली दवाई की जमाखोरी का दोषी पाया गया है। गौतम गंभीर फाउंडेशन को फैबीफ्लू की गैरकानूनी तौर पर जमाखोरी, उसकी खरीद और वितरण का दोषी पाया गया है। इसकी जानकारी ड्रग कंट्रोलर ने दिल्ली हाई कोर्ट को दी है। ड्रग कंट्रोलर ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि अब वो इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। 

हाई कोर्ट ने कोविड मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों की जमाखोरी करने वाले दोषियों के खिलाफ ड्रग कंट्रोल को निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने इसके लिए ड्रग कंट्रोलर को 6 हफ्ते का समय दिया है। हाई कोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर से कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई अब 29 जुलाई को करेगा। 

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हालांकि इससे पहले ड्रग कंट्रोलर ने बीजेपी सांसद गौतम गंभीर फाउंडेशन को क्लीन चिट दे दी थी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर को फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर मामले की जांच ठीक तरह से नहीं की गई तब हाई कोर्ट जांच किसी और को सौंपेगा। इसके बाद ड्रग कंट्रोलर ने गौतम गंभीर फाउंडेशन को फैबफ्लू की जमाखोरी करने का दोषी पाया है। 

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इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि संकट के समय में खुद को मददगार के रूप में दर्शाने की प्रवृति की आड़ में दवाइयों की जमाखोरी की निन्दा होनी चाहिए। गौतम गंभीर फाउंडेशन के अलावा ड्रग कंट्रोलर ने आम आदमी पार्टी के विधायक प्रवीण कुमार को भी दवाइयों की जमाखोरी करने का दोषी पाया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट में हाल ही में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसमें यह कहा गया था कि एक तरफ जहां मरीजों के परिजन दवाइयों की किल्लत के कारण बाजार में दर दर की ठोकरें खा रहे हैं, वहीं बड़े राजनेता दवाओं को खरीद और बेच रहे हैं। याचिका में ऐसे लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी।