कुंभ मेले में एक लाख से अधिक हुए कोरोना के फर्जी टेस्ट, एक ही घर के 500 लोगों की हुई कोरोना जांच

कुंभ मेले का आयोजन एक अप्रैल से 30 अप्रैल के दरमियान हुआ था, इस दौरान नौ एजेंसियों और 22 निजी लैब ने कोरोना जांच की थी

Updated: Jun 15, 2021, 04:23 PM IST

कुंभ मेले में एक लाख से अधिक हुए कोरोना के फर्जी टेस्ट, एक ही घर के 500 लोगों की हुई कोरोना जांच
Photo Courtesy: New Indian Express

नई दिल्ली। कोरोना काल के बीच आयोजित हुए कुंभ मेले में एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कुंभ मेले में शिरकत करने के लिए अनिवार्य किए गए कोरोना जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुंभ मेले के दौरान करीब एक लाख से अधिक फर्जी टेस्ट किए गए थे। 

अंग्रेज़ी के एक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि जांच में दिए गए ज़्यादातर घर के पते और फोन नंबर फर्जी थे। रिपोर्ट के मुताबिक एक ही फोन नंबर 50 लोगों की जांच के दौरान दिए गए थे। इसके साथ ही एक ही एंटीजन किट पर 700 लोगों के सैंपल इकट्ठे किए गए। जबकि एक एंटीजन किट पर केवल एक ही व्यक्ति की कोरोना जांच की जा सकती है। 

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एक ही घर के 500 व्यक्तियों की हुई जांच 

कुंभ मेले के दौरान हुए इस फर्जीवाड़े की जांच करने वाले एक अधिकारी के हवाले से अंग्रेज़ी अख़बार ने कहा है कि घर का पता और फोन नंबर काल्पनिक थे। 530 सैंपल हरिद्वार के मकान नंबर पांच से लिए गए थे। इसका मतलब यह हुआ कि एक ही घर में रहने वाले पांच सौ व्यक्तियों ने अपनी कोरोना की जांच कराई, जो कि बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है। ज़्यादातर कोरोना जांच में घरों के अजीब पते दिए गए हैं। मसलन, मकान संख्या 56 अलीगढ़, मकान संख्या 76, मुंबई।

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जांच में फर्जी फोन नंबर शामिल होने के अलावा कई ऐसे लोग थे जिनकी जांच में एक ही फोन नंबर दर्शाया गया। कानपुर, मुंबई, अहमदाबाद सहित कुल 18 लोकेशन के लोगों का एक ही फोन नंबर था। यहां तक कि जांच के लिए सैंपल इकट्ठा करने वाले लोग तक पेशेवर नहीं थे। छात्रों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को सैंपल एकत्रित करने के काम में लगाया गया था। हद तो तब पार हो गई जब इस बात का खुलासा हुआ कि सैंपल एकत्रित करने वाले ज़्यादातर लोग राजस्थान के रहने वाले थे। जबकि कोरोना के सैंपल को एकत्रित करने वाले व्यक्ति मौके पर मौजूद रहता है।

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उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने कहा है कि जांच रिपोर्ट को हरिद्वार डीएम को प्रेषित कर दिया गया है। पंद्रह दिन के भीतर डीएम द्वारा विस्तृत रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उधर हरिद्वार डीएम ने जांच पूरी होने तक कोरोना जांच करने वाली एजेंसियों के भुगतान पर रोक लगा दी है।