लखीमपुर खीरी कांड के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने किया सरेंडर, फिर से भेजा गया जेल

सर्वोच्च न्यायालय ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका खारिज करते हुए एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा है आशीष मिश्रा

Updated: Apr 24, 2022, 04:35 PM IST

लखीमपुर खीरी कांड के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने किया सरेंडर, फिर से भेजा गया जेल

लखीमपुर खीरी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे और लखीमपुर खीरी कांड के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने आज आखिरकार कोर्ट में सरेंडर कर दिया। लखीमपुर पुलिस ने सरेंडर के बाद आशीष मिश्रा को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आशीष मिश्रा को हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करते हुए एक हफ्ते में सरेंडर के लिए कहा था। सोमवार को सरेंडर करने का आखिरी दिन था। लेकिन आशीष मिश्रा ने मोहलत खत्म होने के पहले रविवार को ही सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। जहां से उन्हें दोबारा लखीमपुर खीरी की जेल में भेज दिया गया है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की गाड़ी में कड़ी सुरक्षा के बीच उसे पिछले दरवाजे से जेल ले जाया गया। रविवार को छुट्टी के दिन सरेंडर करने के पीछे वजह ये बताया जा रहा है कि सोमवार को हफ्ते के पहले दिन कोर्ट में काफी भीड़-भाड़ रहती है। भीड़ से बचने के लिए ही उसने रविवार को सरेंडर कर दिया। लखीमपुर खीरी के आरोपी के सरेंडर के बाद इलाके में भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया है।

बता दें कि लखीमपुर खीरी में चार किसानों को गाड़ी के कुचलने के आरोपी आशीष मिश्र को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एसआईटी ने आशीष के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी, साथ ही जमानत का विरोध भी किया था। लेकिन चार महीने जेल में रहने के बाद आरोपी आशीष मिश्र को हाईकोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई। इसके बाद मामला सर्वोच्च अदालत में पहुंचा।

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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि पीड़ितों को हर स्तर पर सुनवाई का अधिकार है। इस केस में पीड़ित को सुनवाई के अधिकार से वंचित किया गया है। हाईकोर्ट ने कई अप्रासंगिक तथ्यों और अनदेखे उदाहरणों को ध्यान में रखकर फैसला दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि एक हफ्ते में आशीष मिश्रा सरेंडर करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर हाईकोर्ट नए सिरे से विचार करे।