दफ्तर दरबारी: सीएस अनुराग जैन के एक्सटेंशन से टूट गए चार सपने
CS Anurag Jain: मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 30 अगस्त को रिटायर हो रहे थे। अब वे साल भर तक इस पद पर बने रहेंगे। अगले एक साल तक उनके पद पर रहने के कारण कई सपने ध्वस्त हो गए हैं। इस एक्सटेंशन के कारण प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे आईएएस का इंतजार और लंबा हो गया है।

जैसा कि अंदाजा लगाया जा रहा था सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल गया। एक्सटेंशन भी ऐतिहासिक। पहली बार किसी सीएस को एक साथ साल भर का एक्सटेंशन मिला है। उनकी राह रोकने के लिए अज्ञात नामों से शिकायत भी हुई और जमावट भी लेकिन वे मुस्कुराते ही रहे। अंतिम दिन दिल्ली से एक कॉल आया और फाइल जेट गति से दौड़ गई। पांच घंटे में एक्सटेंशन घोषित भी हो गया। लेकिन इस एक्सटेंशन में चार सपने पीछे छूट गए हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 30 अगस्त को रिटायर हो रहे थे। अब वे साल भर तक इस पद पर बने रहेंगे। उनके पद पर रहने के कारण प्रदेश के मुख्य सचिव पद के लिए 3 बड़े दावेदारों 1990 बैच के डॉ. राजेश राजौरा और अलका उपाध्याय व 1991 बैच के अशोक बर्णवाल के सपनों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। आईएएस अलका उपाध्याय केंद्र में पदस्थ हैं। उन्हें नई जिम्मेदारी दे कर सीएस पद की दौड़ से बाहर कर दिया गया था। दूसरे दावेदार डॉ. राजेश राजौरा को अब अगले अगस्त तक आईएएस अनुराग जैन के हटने का इंतजार करना पड़ेगा। उनका रिटारयरमेंट मई 2027 में हैं। यदि वे तब सीएस बन पाए तो उन्हें 9 माह का कार्यकाल मिलेगा। और तब सीएम ने किसी ओर अधिकारी को तवज्जो दे दी तो प्रशासनिक तस्वीर बदल जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिलने से प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला को भी झटका लगा है। इस माह मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ अपर मुख्य सचिव गृह जेएन कंसोटिया भी रिटायर होने वाले हैं। ये दो पद खाली होने पर 1994 बैच के दो अफसर दीपावली रस्तोगी और शिवशेखर शुक्ला को पदोन्नत कर अपर मुख्य सचिव बनाया जाना था। जेएन कंसोटिया के रिटायर होने पर केवल एक पद रिक्त हुआ है और इस पर दीपाली रस्तोगी मुख्य सचिव वेतनमान में पदोन्नति होंगी। हालांकि नई व्यवस्था के अनुसार शिवशेखर शुक्ला को अतिरिक्त मुख्य सचिव का वेतनमान दे दिया जाएगा। इस देरी के कारण अतिरिक्त मुख्य सचिव पद के अन्य दावेदारों आईएएस विवेक अग्रवाल, हरिरंजन राव, अनिरुद्ध मुखर्जी, दीप्ति गौड़ मुखर्जी, संजय कुमार शुक्ला, विवेक अग्रवाल, रश्मि अरुण शमी, मनीष रस्तोगी, दीपाली रस्तोगी को भी देरी का सामना करना पड़ सकता है।
उंगली उठाने वाले कलेक्टर के बचाव में आईएएस एसोसिएशन
विवादों में रहने वाले भिंड के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव एक बार फिर चर्चा में हैं। इसबार वे बीजेपी विधायक से भिड़ गए हैं। भिंड के बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह खाद की समस्या को लेकर समर्थकों के साथ कलेक्टर बंगले पर पहुंचे थे। यहां विधायक की भाषा से नाराज कलेक्टर ने उंगली दिखाते हुए तमीज से बात करने को कहा। इस पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने उन्हें मुक्का दिखाया और फिर थप्पड़ मारने के लिए भी हाथ हिलाया।
विधायक पर उंगली तानने के बाद भी कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का कुछ नहीं बिगड़ा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह जरूर संकट में घिर गए। कलेक्टर के पक्ष में आईएएस आफिसर्स लामबंद हो गए। एमपी आईएएस आफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से मिलकर विधायक के दुर्व्यवहार पर अपना विरोध दर्ज कराया। बीजेपी संगठन ने भी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह को बुला कर सख्त हिदायत दी।
एसोसिएशन के समर्थन से कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का पक्ष मजबूत जरूर हुआ है लेकिन प्रमोटी आईएएस भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का विवादों से पुराना नाता है। वे जुलाई माह में भी सुर्खियों में आए थे जब एक वायरल वीडियो में वे परीक्षा के दौरान एक छात्र को कई थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए थे। बताया गया कि वे नकल करने से नाराज थे। लेकिन परीक्षा कक्ष में छात्र को इस तरह मारने पर उनकी तीखी आलोचना हुई थी। यही नहीं तहसीलदार माला शर्मा ने भी उन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। फरवरी 2025 में हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने लोक निर्माण विभाग के मामले में उन्हें फटकार लगाई थी और सवाल उठाया कि क्या उन्हें फील्ड में रहना चाहिए?
ये वही कलेक्टर हैं जिन पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। छात्र हो या विधायक यदि गलती करता है तो प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वैधानिक कार्रवाई का अधिकार है मगर हाथ उठाने, उंगली उठाने जैसी प्रतिक्रिया तंत्र के लिए उपयुक्त नहीं है। जनप्रतिनिधि पहले ही अफसरों पर नजरअंदाज करने, तवज्जो न देने तथा सम्मान नहीं करने के आरोप लगाते रहे हैं। यह आरोप भी नया नहीं है कि कलेक्टर भी उन्हीं विधायकों की सुन रहे हैं जो ताकतवर हैं। ऐसे में भिंड कलेक्टर की प्रतिक्रिया सवालों को तो खड़ा करती है। विधायक को तो पार्टी ने नसीहत दे दी लेकिन जनप्रतिनिधि को उंगली दिखाने वाली अफसरी मानसिकता का क्या होगा?
खनन अनुमतियों पर अफसरों की निर्णय पर सु्प्रीम सख्ती
मध्यप्रदेश स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) को नियमों के आधार पर बायपास कर 237 अवैध पर्यावरण अनुमतियां जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के अफसरों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आईएएस अधिकारी पर्यावरण स्वीकृति जारी करेंगे, तो फिर सिया की स्वतंत्र संस्था होने का क्या मतलब रह जाएगा? इस मामले पर केंद्रीय पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को नोटिस जारी जवाब मांगा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सिया के चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने आरोप लगाया है कि सिया की सदस्य सचिव उमा महेश्वरी, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी ने मिलकर प्राधिकरण की बैठकों में देरी की, ताकि खनन माफियाओं को फायदा पहुंचाया जा सके। सिया अध्यक्ष का आरोप है कि उन्होंने सदस्य सचिव व पीएस को कई पत्र लिखे, पर बैठकें नहीं हुईं। इस बीच महेश्वरी सिक लीव पर गईं। तब सदस्य सचिव के प्रभार में श्रीमन शुक्ल 237 आवेदनों में ईसी जारी कर दी। पीएस कोठारी ने अनुमोदन किया। इन आवेदनों को 45 दिन से अधिक हो चुके थे। आरोप है कि इसके लिए सिया की अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया को भी दरकिनार कर कई प्रोजेक्ट्स को बिना अधिकार स्वीकृति दे दी।
इस मामले में सिया चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव और केंद्र सरकार को पत्र लिख कर आईएएस अफसरों के खिलाफ एफआईआर करवाने को कह दिया था। सिया चेयरमैन के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि सिया की बैठकें क्यों नहीं करवाई गई? प्रमुख सचिव ने ईसी का अनुमोदन कैसे किया? इस मामले पर सरकार ने पर्यावरण सचिव नवनीत मोहन कोठारी और एप्को की कार्यपालन निदेशक उमा महेश्वरी को पद से हटा दिया है। लेकिन जो अनुमतियां जारी हो गई उनके औचित्य का सवाल बना हुआ है।
कलेक्टरी में नहीं लग रहा मन
जहां कई आईएएस कलेक्टर बनने को आतुर बने बैठे हैं वहीं 2015 बैच की आईएएस गुंचा सनोबर का कलेक्टरी में मन नहीं लग रहा है। उन्हें जनवरी 2025 में बड़वानी का कलेक्टर बनाया गया था। कुछ माह काम करने के बाद उन्होंने सिक लिव मांगी लेकिन अवकाश स्वीकृत न हुआ। फिर वे सामान्य अवकाश पर चली गई हैं। उसके बाद से वे बार–बार अवकाश बढ़ाए जा रही हैं। उनके बदले जिला कलेक्टर का कार्य जिला पंचायत सीईओ काजल जावला संभाल रही हैं।
सवाल उठ रहे हैं कि बड़वानी जैसा जिला कब तक प्रभारी कलेक्टर के भरोसे रहेगा। सिंतबर के शुरुआती दिनों में प्रशासनिक सर्जरी संभावित है और इसबार संभव है कि बड़वानी को नया कलेक्टर मिल जाए। उधर, उज्जैन संभागायुक्त का पद भी एक माह से खाली पड़ा है। उज्जैन संभागायुक्त संजय गुप्ता के 31 जुलाई को रिटायर होने के बाद अतिरिक्त आयुक्त रत्नाकर झा के संभागायुक्त का प्रभार संभाले हुए हैं। हरदा, शाजापुर, श्योपुर व बुरहानपुर में जिला पंचायत सीईओ के पद भी खाली हैं। ये दायित्व भी अलग-अलग अफसर संभाल रहे हैं। सीएस अनुराग जैन को सेवावृद्धि मिलने के बाद अब आसार है कि लंबे समय से रूकी हुई तबादला सूची को हरी झंडी मिल जाएगी।