Onam 2020: भारत की समृद्ध परंपरा का प्रतीक ओणम

Happy Onam: केरल में राजा महाबली के खुशहाल शासनकाल की याद में मनाया जाता है ओणम उत्सव, प्रजा का हाल जानने पाताल से आते हैं राजा बलि

Updated: Aug 31, 2020 11:22 PM IST

Onam 2020: भारत की समृद्ध परंपरा का प्रतीक ओणम

आज दक्षिण भारत के साथ-साथ देशभर में ओणम का त्योहार बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। यह केरल का सबसे बड़ा पर्व है। ओणम श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है। इसदिन लोग आपस में मिल-जुलकर खुशियां बांटते हैं। ओणम को थिरुओणम भी कहा जाता है। इस दिन राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल जानने आते हैं। ओणम को कृषि पर्व भी कहा जाता है, नई फसल उगने के उल्लास में भी मनाया जाता है। दक्षिण भारत में चाय, इलायची, अदरक और धान जैसी फसलें इन्ही दिनों तैयार होती हैं। फसलों की सुरक्षा और अपने सुख समृद्धि की कामना की जाती है। ओणम के दिन श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना की जाती है। ओणम के मौके पर नौका दौड़ का भी आयोजन किया जाता है।

 दस दिनों तक मनाया जाता है ओणम

दक्षिण भारत में ओणम की छटा देखते ही बनती है। ओणम एक सांप्रादायिक सद्भावना का पर्व है। जिसे हर धर्म और संप्रदाय के लोग मिल जुलकर मनाते हैं। ओणम का त्योहार पूरे दस दिनों तक चलता है। इसका उल्लास, उमंग लोगों को नई ऊर्जा देता है। मलयाली परिवार घरों में ही पूजा करते हैं। घर के भीतर ही फूल-ग्रह बनाते हैं। घर के कमरे में ही सर्कल में फूल सजाए जाते हैं। जिसे लगातार 8 दिन तक सजाने की परंपरा है। नौंवे दिन घर के अंदर भगवान विष्णु की मूर्ति रखी जाती है। इस पूजा में पूरा परिवार शामिल होता है और गीत गाता है। इसके साथ ही रात में समय श्रावण देवता और गणपति की पूजा की जाती है जिसे 10वें दिन विसर्जन करने की परंपरा है। ओणम पर्व में 10 दिनों तक अलग-अलग तरह से पूजा की जाती है। ये हैं एथम, चिथिरा, चोधी, विसाकम, अनिज़ाम, थ्रिकेता, मूलम, पूरादम, उथिरादम और थिरुवोणम।

मलयाली कैलेण्डर के चिंगम महीने में मनाते हैं ओणम

ओणम मलयालम सौर कैलेण्डर के चिंगम माह में मनाए जाने की परंपरा है। भगवान विष्णु के वामन रूप में अवतार लेने और सम्राट महाबलि के धरती पर पुनः आगमन के मौके पर ओणम का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि जिस दिन अथम नक्षत्र प्रबल होता है, उसी दिन से दस दिवसीय ओणम पर्व की शुरुआत होती है। उत्सव थिरुवोणम तक जारी रहता है। अथम नक्षत्र को हस्त नक्षत्र के नाम से जाना जाता है।

फूलों की रंगोली और दिए से सजाते हैं घर

ओणम के मौके पर लोग अपने घरों को खूबसूरती से सजाते हैं। दक्षिण भारतीय परिवार घरों के आंगन में रंगोली बनाते हैं। इसे ओणमपुक्कलम कहा जाता है। दस दिवसीय ओणम के पहले दिन बनाई जाने वाली रंगोली छोटी होती है, जिसे हर दिन लगातार बड़ा किया जाता है। और दसवें दिन सबसे बड़ी रंगोली सजाई जाती है। ओणम पर फूलों की रंगोली पर दीप भी जलाए जाते हैं।

भगवान विष्णु ने लिया वामन अवतार

पौराणिक मान्यता के अनुसार महाबली नाम का असुर राजा बड़ा ही प्रजा वत्सल था। उसे प्रजा देवता की तरह पूजती थी। राजा बलि ने अपने तपोबल से कई दिव्य शक्तियाँ प्राप्त कर ली थीं। जिससे देवता भयभीत थे। राजा महाबली ने देवराज इंद्र को हराकर स्वर्गलोक पर अधिकार प्राप्त कर लिया। राजा बलि से हारकर इंद्र दुखी थे। उनकी स्थिति देखकर देव माता अदिति ने अपने पुत्र के उद्धार के लिए भगवान विष्णु की आराधना की। देवमाता अदिति की आराधना से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। और उनके बेटे बनकर जन्म लेने का आशीर्वाद दिया और कहा कि उनके पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया राजपाट लौटा देंगे।फिर माता अदिति के गर्भ से भगवान विष्णु ने वामन के रूप में अवतार लिया।

महाबली राजा बलि के स्वागत में मनाते हैं ओणम 

एक बार राजा महाबली स्वर्ग पर स्थायी अधिकार प्राप्त करने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे। तभी वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु पहुंचे। महाबली ने उनका स्वागत सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा। तब भगवान वामन ने महाबली से तीन कदम रखने के लिये जगह मांगी। जिसे महाबली ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। भगवान वामन ने अपने एक पग से भू लोक, दूसरे पग से आकाश लोक नाप लिया। तब महाबली ने अपना वचन पूरा करने के लिये वामन देव के सामने अपना सिर झुका दिया। जिसके बाद महाबली पाताल लोक चले गये। इससे प्रजा दुखी हो गई। महाबलि के प्रति प्रजा के प्रेम को देखकर भगवान विष्णु ने महाबली को वरदान दिया कि वे साल में एक बार तीन दिन के लिए अपनी प्रजा से मिलने आ सकेंगें।

तभी से ओणम मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसदिन मलयाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों के साथ परंपरा को साथ मिलकर मनाते हैं। इस साल कोरोना महामारी के कारण किसी तरह का सार्वजनिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं है।

ओणम पर बनाए जाते हैं विविध व्यंजन

दक्षिण भारतीय परिवारों में ओणम के मौके पर साध्या थाली बनाने की परंपरा है। इस थाली में 26 तरह के शाकाहारी पकवान बनाए जाते हैं। जिनमें केले चिप्स, पापड़, सब्जियों से बने कई तरह के व्यंजन, मीठे और खट्टे अचार, अवियल, सांभर, दाल और उसके साथ थोड़ा सा घी, रसम, दो अलग-अलग तरह के छाछ, चटनी, पायसम जो की खासतौर पर चावल, नारियल के दूध और गुड़ डालकर बनाई जाती है। पकवानों को बड़ी खूबसूरती से केले के पत्तों पर परोसा जाता है। केरल के सभी घरों में लोग साध्या का सेवन करने के लिए जमीन पर बैठते हैं और इसे हाथ से खाया जाता है।