वोटिंग के समय ही काउंटिंग करती है EVM, वायरलेस से कंट्रोल होता है डिस्प्ले, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

हाईकोर्ट पहुंचा ईवीएम की विश्वसनीयता का मामला, याचिकाकर्ता का दावा, हार को जीत में बदल सकती है ईवीएम, चुनाव आयोग ने भी माना कि बाहर से कंट्रोल हो सकता है ईवीएम

Updated: Oct 20, 2021, 06:24 PM IST

वोटिंग के समय ही काउंटिंग करती है EVM, वायरलेस से कंट्रोल होता है डिस्प्ले, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
Photo Courtesy: Thenewindianexpress

जबलपुर। मध्य प्रदेश उपचुनाव से पहले एक बार फिर ईवीएम की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। दरअसल, जबलपुर हाईकोर्ट में ईवीएम को लेकर एक और याचिका दायर हुई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि ईवीएम हार को जीत में बदल सकती है क्योंकि वह वोटिंग के दौरान ही काउंटिंग भी कर लेती है। इतना ही नहीं याचिकाकर्ता ने बताया है कि खुद चुनाव आयोग ने भी स्वीकार किया है कि वायरलेस के जरिए ईवीएम के डिस्प्ले को कंट्रोल किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता मध्य प्रदेश विकास पार्टी के अध्यक्ष मोतीलाल अहिरवार ने EVM को पारदर्शी बनाने अन्यथा उसके प्रयोग पर रोक लगाये जाने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि EVM मतदान केंद्र पर ही मतों की गणना करती है, जबकि यह मतगणना केंद्र पर होनी चाहिए। आवेदक के मुताबिक काउंटिंग के दिन रिटर्निंग ऑफिसर EVM का रिजल्ट बटन दवा कर केवल परिणामों की घोषणा करता है।

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याचिकाकर्ता ने बताया है कि चुनाव के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को तैयार करने में 5 कार्य किए जाते हैं। इनमें FLC, रेन्डोमैजेशन, सिंबल लोडिंग, कैंडिडेट सेटिंग और पिंक पेपर सील से मशीन को सील करना शामिल हैं। ये सभी काम EVM बनाने वाली कंपनी BEL और ECIL के इंजीनियर करते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ये काम निर्वाचन आयोग को करना चाहिए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि EVM मैनुअल में खुद चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि इन इंजीनियरों की सत्यनिष्ठा चुनाव आयोग के प्रति नहीं है। आवेदक के मुताबिक EVM मैनुअल के पेज 133 पर स्वयं चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है कि अगर किसी की EVM के FLC तक पहुंच हो जाये तो डिस्प्ले के वास्तविक मॉड्यूल को बदलकर अथवा अतिरिक्त सर्किट डालकर बाहर से वायरलेस के जरिए ईवीएम को कंट्रोल किया जा सकता है और EVM की मेमोरी चिप भी बदली जा सकती है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि चूंकि ईवीएम का डिस्प्ले बाहर से वायरलेस से कंट्रोल हो सकता है, ऐसे में मतदान केंद्र पर मेमोरी चिप जिसमें वोट एकत्रित होते हैं उसके संबंध बताया जाए कि वह खाली है या नहीं। साथ ही उसमें कोई अतिरिक्त सर्किट नहीं डाली गई है। आवेदक के मुताबिक चूंकि यह सब सॉफ्टवेयर का काम है, इसलिए प्रत्याशी को एजेंट के रूप में अपना इंजीनियर नियुक्त करने की भी अनुमति दी जानी चाहिए। वर्तमान में चुनाव आयोग ने ईवीएम निर्माता कंपनी के इंजीनियरों को छोड़कर किसी भी इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ को ईवीएम तक जाने से प्रतिबंधित किया है।

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बताया जा रहा है कि जल्द ही हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगी। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब ईवीएम को कठघरे में खड़ा किया गया हो। बल्कि समय-समय पर लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव चुनाव की गरिमा को बरकरार रखने में ईवीएम को नाकामयाब बताया जाता रहा है। सत्तारूढ़ बीजेपी से लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत दर्जनों अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि ईवीएम को लेकर आशंका जता चुके हैं। 

बावजूद न तो न्यायपालिका और न ही चुनाव आयोग ने ईवीएम को लेकर कोई ठोस फैसला लिया है। मतदाताओं में भी ईवीएम को लेकर उहापोह की स्थिति इसलिए है क्योंकि जिन विकसित देशों ने सबसे पहले ईवीएम की व्यवस्था को लागू किया वे खुद अब पारंपरिक वोटिंग प्रणाली की ओर लौट चुके हैं। ऐसे में ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर सवाल और गहरा चुके हैं।