MP: महामहिम के गले में भाजपा का पट्टा, संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना के लगे आरोप
मध्य प्रदेश सरकार के एक कार्यक्रम में पहुंचे राज्यपाल के गले में डाला गया भाजपा का पट्टा, कम्युनिस्ट पार्टी ने की नैतिकता के नाते इस्तीफे की मांग

इंदौर। बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। विवाद का कारण शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान उनके गले में देखा गया भाजपा का पट्टा है। विपक्ष ने इसपर आपत्ति जताई है। महामहिम पर संवैधानिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगाया जा रहा है और नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की जा रही है।
दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने टंट्या मामा की जयंती के मौके पर पातालपानी और इंदौर में बलिदान दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री समेत राज्यपाल मंगूभाई पटेल भी पहुंचे थे। जब इंदौर में राज्यपाल हेलिकॉप्टर से उतरे तो उनके गले मे बीजेपी का पट्टा डालकर स्वागत किया गया।
हैरानी की बात ये है कि राज्यपाल के गले में जब बीजेपी का पट्टा डाला गया तो आपत्ति जताना तो दूर, मुस्कुराते हुए उन्होंने खुद अपना सर आगे कर दिया और गले में पट्टा डालकर चलने लगे। कांग्रेस ने इसपर आपत्ति जताई है। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने उन्हें याद दिलाया है कि राज्यपाल का पद एक संवैधानिक पद होता है।
महामहिम राज्यपाल जी का पद संवैधानिक होता है लेकिन मध्यप्रदेश के राज्यपाल जी का आज टंटया मामा के कार्यक्रम में पहुँचने पर,आगवानी में स्वागत भाजपा के चुनाव चिन्ह वाले गमछे से किया गया…?
— Narendra Saluja (@NarendraSaluja) December 4, 2021
ना राज्यपालजी ने रोका और ना किसी अन्य ने, गले में भाजपा का गमछा डला रहा , बेहद आपत्तिजनक…? pic.twitter.com/Jq9nytWb4C
इस्तीफे की उठी मांग
मामले पर सीपीएम के वरिष्ठ नेता बादल सरोज ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल से इस्तीफे की मांग की है। बादल सरोज ने कहा कि, 'बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोग संवैधानिक लोकतंत्र की मर्यादाओं का पालन नहीं करते। RSS जिससे मंगूभाई पटेल जुड़े हैं हुए वह अपनी किताबों में कह चुका है कि उसे संसदीय लोकतंत्र नहीं बल्कि एक निजाम चाहिए। यह पहली घटना नहीं है। कप्तान सिंह सोलंकी जब हरियाणा में राज्यपाल बनकर गए तो वहां वे शाखा लगाते थे।'
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बादल सरोज ने आगे कहा कि, 'संसदीय लोकतंत्र की जो लक्ष्मण रेखा है उसे आरएसएस से जुड़े लोगों ने कभी माना ही नहीं। उनमें थोड़ी बहुत भी नैतिकता बची है तो राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। संवैधानिक पद पर बैठने का उन्हें कोई नैतिक अधिकार नहीं है। गले मे पट्टा डालना है तो वे बीजेपी के कार्यकर्ता बन जाएं और जितना मन हो उतना पट्टा डाल लें। प्रदेश को राज्यपाल के रूप में बीजेपी और आरएसएस का एजेंट नहीं चाहिए।'