सरहद पर आमने-सामने हैं जवान, व्यापार में टूटे सारे रिकॉर्ड, बेअसर रहा ड्रैगन का बहिष्कार वाला कैंपेन

भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय ट्रेड 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, उधर सीमा पर दोनों देशों में गतिरोध बरकरार है

Updated: Dec 29, 2021, 01:47 PM IST

सरहद पर आमने-सामने हैं जवान, व्यापार में टूटे सारे रिकॉर्ड, बेअसर रहा ड्रैगन का बहिष्कार वाला कैंपेन
Photo Courtesy: Business Line

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय ट्रेड 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इस ट्रेड सक्सेस के बाद भी दोनों देशों में कोई व्यापारिक जश्न का आयोजन नहीं है। वजह साफ है, पूर्वी लद्दाख़ में सैन्य गतिरोध के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि हर 2 महीने में बायकॉट चीन ट्रेंड करने वाले भारत के चीन से व्यापार में रिश्ते गहरे क्यों होते जा रहे हैं।

साल 2001 में जब भारत में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार थी, उस वक्त भारत और चीन के बीच का द्विपक्षीय व्यापार की शुरुआत हुई थी। हालांकि, उस साल व्यापार महज 1.83 अरब डॉलर था और दोनों ही देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन साल 2021 में दोनों ही देशों ने आश्चर्यजनक रूप से 100 अरब अमेरिकी डॉलर के मील के पत्थर को हासिल कर लिया, जो व्यापार के क्षेत्र में दो देशों के बीच एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिसका बीजिंग ने स्वागत किया है।

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आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से नवंबर 2021 के बीच भारत और चीन में कुल 114.263 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। साल 2020 से यदि तुलना की जाए तो इसमें सालाना बेसिस पर 46.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। भारत से चीन के लिए 26.358 अरब डॉलर का निर्यात हुआ और सालाना बेसिस पर इसमें 38.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं, चीन से भारत में आयात 87.905 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो कि सालाना बेसिस पर 49 फीसदी ज्यादा है। दोनों ही देशों के संबंध एक तरफ जहां सीमा पर बिगड़ रहे हैं, तो व्यापार में दोनों ही देश काफी गर्मजोशी दिखा रहे हैं। इससे जाहिर है की व्यापार के जरिए दोनों देशों को लाभ भी मिल रहा है।

भारत के लिए चिंता की बात ये है कि चीन के साथ व्यापारिक घाटा बढ़ गया है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 महीनों में भारत का व्यापारिक घाटा और भी ज्यादा बढ़ गया है। यानि, भारत का चीन के साथ एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट के बीच का फासला और ज्यादा बढ़ा है और ये वृद्धि 53.49 फीसदी है। यानि, भारत और चीन के बीच का व्यापारिक घाटा अब बढ़कर 61.547 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। यानि, एक बात जो साफ तौर पर जाहिर हो रही है, कि मेक इन इंडिया का चीन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और इस साल भी भारत सरकार चीन में भारतीय सामान भेजने में कामयाब नहीं हो पाई है।

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बता दें कि पिछले साल जून महीने में गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक भिड़ंत हुई थी। इस दौरान भारत के 20 जवान शहीद हो गये थे। उसके बाद से दोनों ही देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। देश में अक्सर चीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैंपेन छिड़ता है। इसी बीच ये भी खबरें आ रही है कि चीन भारतीय क्षेत्र पर तेजी से कब्जा कर रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमलावर हैं, उधर सरकार व्यापार को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचाने में जुटी हुई है।