स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, सच्चाई पेश करना मीडिया की जिम्मेदारी, मीडिया के गिरते स्तर CJI ने फिर जताई चिंता

एक पत्रकार द्वारा लिखी गई एक शानदार स्टोरी को डेस्क द्वारा रोककर खत्म कर दिया जाता है, यह एक सच्चे पत्रकार के लिए पूरी तरह से मनोबल गिराने वाला है: चीफ जस्टिस एनवी रमना

Updated: Jul 27, 2022, 01:08 PM IST

स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, सच्चाई पेश करना मीडिया की जिम्मेदारी, मीडिया के गिरते स्तर CJI ने फिर जताई चिंता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने एक बार फिर मीडिया के गिरते स्तर को लेकर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई पेश करना मीडिया की जिम्मेदारी है।

चीफ जस्टिस एनवी रमना मंगलवार को एक पुस्तक ‘द गीता विजाना उपनिशद’ के लॉन्चिंग कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने मीडिया की मौजूदा हालातों को लेकर तल्ख टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ने कहा कि, 'जोखिम लेने और कड़ी मेहनत करने के बाद, एक पत्रकार द्वारा लिखी गई एक शानदार स्टोरी को डेस्क द्वारा रोककर खत्म कर दिया जाता है। यह एक सच्चे पत्रकार के लिए पूरी तरह से मनोबल गिराने वाला है। अगर वे बार-बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं और पेशे से विश्वास खो देते हैं, तो आप उन्हें दोष नहीं दे सकते।'

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सीजेआई रमना ने आगे कहा कि, 'जब एक मीडिया हाउस के व्यावसायिक हित होते हैं तो वो बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अक्सर व्यावसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना पर हावी हो जाते हैं। नतीजतन, लोकतंत्र से समझौता होता है। एक समय ऐसा था जब मीडिया सिर्फ व्यावसायिक सामान नहीं था। मीडिया आपातकाल के काले दिनों में लोकतंत्र के लिए लड़ने में सक्षम था।'

उन्होंने आगे कहा कि, 'मीडिया घरानों के बर्ताव पर समय समय पर आंकलन किया जाना चाहिए। और किया भी जायेगा। आंकलन के समय उनके आचरण से उचित निष्कर्ष निकाला जायेगा। स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है। पत्रकार जनता के आंख-कान होते हैं।' उन्होंने मीडिया घरानों से आह्वान किया कि वे खुद को सिर्फ बिजनेस के तौर पर इस्तेमाल न करें।

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बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब सीजेआई ने मीडिया के गिरते स्तर को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पिछले हफ्ते ही एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, 'मीडिया द्वारा कंगारू कोर्ट चलाया जा रहा है। मीडिया द्वारा फैलाए जा रहे पक्षपातपूर्ण विचार लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं और सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रिंट मीडिया में अभी भी कुछ हद तक जवाबदेही है। जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जवाबदेही शून्य है।'