Surkhi By Poll 2020: पारुल साहू की उम्मीदवारी से बढ़ी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मुश्किलें

MP By Poll 2020: सुरखी को अपना अजेय किला मानने वाले गोविंद सिंह को पहले भी मात दे चुकी हैं पारुल, कांग्रेस में आने के बाद फिर एक बार दोहरा सकती हैं इतिहास

Updated: Sep 28, 2020 07:27 PM IST

Surkhi By Poll 2020: पारुल साहू की उम्मीदवारी से बढ़ी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मुश्किलें
Photo Courtsey: camera 24

सुरखी। मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सागर जिले की सुरखी सीट हाई-प्रोफाइल मानी जा रही है। सुरखी में कांग्रेस ने पारुल साहू को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है जिसके बाद अब बीजेपी नेता व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है। हालांकि गोविंद राजपूत अपनी सीट बचाने के लिए तमाम जुगत लगा रहे हैं और इसी कड़ी में उन्होंने राम शिला रथ यात्रा का आयोजन कर राममंदिर को मुद्दा बनाने का प्रयास किया था।

पारुल साहू के कांग्रेस उम्मीदवार घोषित होने के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का समीकरण बदल गया है। बता दें कि सुरखी को अपना अजेय किला मानने वाले गोविंद सिंह राजपूत का भ्रम साल 2013 में तब टूटा था जब लगातार 2003 से विधायल रहे राजपूत को परुह साहू ने शिकस्त दी थी।

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तब गोविंद कांग्रेस में थे और पारुल की उम्मीदवारी बीजेपी से हुई थी। इसके बाद साल 2018 में बीजेपी ने पारुल को टिकट नहीं दिया था जिसके बाद गोविंद सिंह राजपूत तीसरी बार वहां से चुनाव जीतने में सफल रहे थे। हालांकि बाद में उन्होंने सिंधिया के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया था। जानकारों का मानना था कि गोविंद राजपूत चौथी बार भी चुनाव जीतने में कामयाब होंगे चूंकि बीजेपी से उन्हें टिकट मिलेगी और कांग्रेस में उनके खिलाफ कोई बड़ा चेहरा नहीं है।

उपचुनाव से पहले मध्यप्रदेश में लगातार बदल रहे समीकरणों के बीच सुरखी विधानसभा तब सुर्खियों में आया जब 18 सितंबर को पारुल साहू ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी के कई बड़े नेता पारुल को मनाने में लगे थे पर कांग्रेस ने रविवार (27 सितंबर) को पारुल को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसी के साथ पारुल अपने पुराने अंदाज में एक बार फिर से गोविंद राजपूत के खिलाफ चुनाव प्रचार अभियान में जुट गईं हैं।

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क्या है मौजूदा गणित ?

सुरखी विधानसभा के इतिहास को देखा जाए तो यहां जातीय समीकरण का कभी बोलबाला नहीं रह है बल्कि प्रत्याशी को जीत दिलाने में सभी समुदायों का योगदान रहता है। यहां सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसे विकास के मुद्दों पर चुनावी माहौल तैयार होता है। प्रत्याशियों के प्रचार अभियान को देखें तो एक ओर गोविंद सिंह राजपूत राम मंदिर और मोदी के नाम पर वोटर्स को साधने की जुगत में हैं, वहीं पारुल साहू लगातार मतदाताओं को यह बता रही हैं कि गोविंद ने आपके बहुमूल्य मत का सौदा किया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सुरखी विधानसभा की जनता विधायक बनाकर किसे सुर्खियों में लाने के मूड में हैं।