Opinion at Humsamvet In Hindi

मेरा दुख यह है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए

राहुल गांधी वर्तमान में भारतीय राजनीति के एकमात्र ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन पर चर्चा...

सवाल राहुल गांधी का नहीं, हिंदुस्तान की आजादी का है

यह समय राहुल की फिक्र करने का नहीं है, बल्कि अपनी फिक्र करने का है। अगर हम राहुल...

नईदुनिया को ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले इंदौर की दमदार आवाज...

अभय जी के प्रधान संपादक रहते हुए नईदुनिया ने हिन्दी पत्रकारिता में जो ऊंचाई हासिल...

जलसंकट का प्रतीक फोटो साभार mei.edu

सर्दी के बाद सीधे मानसून, हमारी लापरवाहियों से ऐसे ही गहराएगा...

विश्‍व जल दिवस 2023: आज विश्‍व जल दिवस है। आज के दिन भी अगर हम पानी की बात नहीं...

संविधान है तो हम हैं: भारतीय संविधान के मूल स्वरूप पर संकट

गांधी विभाजन को एक ‘‘आध्यात्मिक दुर्घटना” कहते थे। विभाजन से असहमत होते हुए भी उन्होंने...

प्रवासी और ग्लोबल समिट के राजनीतिक मायने

इवेंट मैनेजमेंट से बनाई और चलाई जाने वाली सरकारें जानती है आम को खास बनाना हो और...

हम तो भविष्य बदरी को भी लील रहे हैं, जोशीमठ तो विनाशलीला...

विनाश को बुलावा तो खुद हिमालय ने ही दिया है। क्यों? क्योंकि वह इतना भरपूर हैं, इतना...

ये वो गांधी तो नहीं है, पर कुछ तो है जो जोड़ने के लिए कठिन...

दांडी यात्रा के बाद 17 वर्ष लगे भारत को आजाद होने में। दांडी यात्रा करीब 390 किलोमीटर...

आँसुओं से भरे दिए में डूब गई दिवाली

अखबार बाजार में हो रही विस्फोटक खरीदी की खबरों से अटे पड़े हैं। अयोध्या से लेकर उज्जैन...

अखबार दुरुस्त नहीं रहेंगे तो आजादी किस काम की: महात्मा...

आज की परिस्थिति में मीडिया का जो स्वरूप हमारे सामने है वह वास्तव में बेहद अटपटा...

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